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92 फीसदी महिलाओं को 10 हजार रुपये से भी कम मिलता है वेतन

देश में महिला सशक्तिकरण के नाम पर खूब प्रचार किया जा रहा है। पुरुषों और महिलाओं में समानता की बातें की जा रही हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। इसी संबंध में अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के रोजगार केंद्र ने श्रम ब्यूरो के पांचवीं वार्षिक रोजगार-बेरोजगारी सर्वेक्षण (2015-2016) के आधार पर स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया, 2018 रिपोर्ट तैयार की है।

इसके मुताबिक, देश में कामकाजी 92 फीसदी महिलाओं को प्रति माह 10,000 रुपये से भी कम की तनख्वाह मिलती है। इस मामले में पुरुष थोड़ा बेहतर स्थिति में हैं। हालांकि 82 फीसदी पुरुषों को भी 10,000 रुपये प्रति माह से कम की तनख्वाह मिलती है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में राष्ट्रीय स्तर पर 67 प्रतिशत परिवारों की मासिक आमदनी 10,000 रुपये थी, जबकि सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) द्वारा मिनिमम सैलरी 18,000 रुपये प्रति महीना है। इससे साफ होता है कि भारत में एक बड़े तबके को मजदूरी के रूप में उचित भुगतान नहीं मिल रहा है।

रिपोर्ट में ये सामने आया है कि पिछले तीस सालों में संगठित क्षेत्र की उत्पादक कंपनियों में श्रमिकों की उत्पादकता 6 फीसदी तक बढ़ी है, जबकि उनके वेतन में मात्र 1.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

श्रम ब्यूरो के सर्वे के अनुसार 2015-16 के दौरान, भारत की बेरोजगारी दर पांच प्रतिशत थी, जबकि 2013-14 में यह 4.9 फीसदी थी। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि बेरोजगारी दर शहरी क्षेत्रों (4.9 फीसदी) की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों (5.1 फीसदी) में मामूली रूप से अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर अधिक है। राष्ट्रीय स्तर पर महिला बेरोजगारी दर जहां 8.7 प्रतिशत है वहीं पुरुषों के बीच यह दर चार प्रतिशत है। काम में लगे हुए व्यक्तियों में से अधिकांश व्यक्ति स्वरोजगार में लगे हुए हैं।

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