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केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया हब बनाने के फैसले से हाथ पीछे खींचे

सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए सोशल मीडिया हब बनाने के फैसले से केंद्र सरकार पीछे हट गई है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने इस मसले पर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। 13 जुलाई को पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह निगरानी राज बनाने जैसा होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार नागरिकों के वॉट्सएप संदेशों को टैप करना चाहती है। बता दें कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोशल मीडिया हब बनाने का निर्णय लिया था।

केंद्र सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि सोशल मीडिया हब बनाने के प्रस्ताव वाली अधिसूचना वापस ले ली गई है और सरकार अपनी सोशल मीडिया नीति की गहन समीक्षा करेगी।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चंद्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल की इस दलील पर विचार किया कि अधिसूचना वापस ली जा रही है. पीठ ने इसके बाद प्रस्तावित सोशल मीडिया हब को चुनौती देने वाली याचिका का निस्तारण कर दिया। वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि सरकार अपनी सोशल मीडिया नीति की पूरी तरह समीक्षा करेगी।

तृणमूल कांग्रेस विधायक मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा था कि सोशल मीडिया की निगरानी के लिए केंद्र यह कार्रवाई कर रहा है। इसके बाद ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम व ईमेल में मौजूद हर डेटा तक केंद्र की पहुंच हो जाएगी और यह निजता के अधिकार का यह सरासर उल्लंघन है।

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