Social

जातिवाद की गहरी जड़ें : खबरदार! यहां आम रास्ते से दलितों के मुर्दों का गुजरना मना है


Updated On: 2016-01-14 12:26:04 जातिवाद की गहरी जड़ें : खबरदार! यहां आम रास्ते से दलितों के मुर्दों का गुजरना मना है

नई दिल्ली। तमिलनाडु में जातिवाद की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि दलितों के मुर्दों को भी श्मशानघाट तक लाने के लिए आम रास्ते का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। तमिलनाडु के नागपट्टनम जिले के कुट्टालम तालक के थिरुनालकोंडाचेरी गांव में बीते दिनों दलित अपने परिवार के सदस्य चेल्लामुथु के शव को आम रास्ते से नहीं ले जा सके। उन्होंने उच्च न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

एक हिंदी अखबार की खबर के मुताबिक पिछले महीने चेल्लामुथु की मृत्यु हो गई। तमिलनाडु के अन्य क्षेत्रों की तरह थिरुनालकोंडाचेरी गांव में जातिवादी व्यवस्था ने पांव पसारे हुए हैं। मौत के बाद भी यहां जाति दलितों का पीछा नहीं छोड़ती। यहां श्मशान तक जाने के लिए आम रास्ता अलग है और दलितों का रास्ता अलग। दलितों का रास्ता बहुत ही खराब हालत में है, इसलिए चेल्लामुथु के घर वालों ने आम रास्ते उसका शव श्मशान तक ले जाने का फैसला किया।

आम रास्ते पर दलितों का चलना मना है। दलितों के खिलाफ तमिलनाडु में प्रचलित ये एक ऐसा कानून है, जो किसी दस्तावेज में दर्ज नहीं है। हालांकि धर्म और पंरपरा की दुहाई पर ये अब तक कायम है। चेल्लामुथु के परिजनों को भी यह अहसास था कि उन्हें आम रास्ते से होकर नहीं जाने दिया जाएगा।

यह सोचकर ही उसके पोते कार्तिक ने तमिलनाडु उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा दिया। कोर्ट ने उन्हें आम रास्ते से शव ले जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई कानून नहीं है जो दलितों को आम रास्ते का इस्तेमाल करने से रोकता है।

कोर्ट ने नागपट्टनम जिले की प्रशासन और पुलिस को आदेश दिया कि वो ये सुनिश्चित करें कि आम रास्ते से सभी लोग आ जा सकें। उसके बाद अधिकारियों ने दलित और तथाकथित ऊंची जाति के प्रतिनिधियों को बुलाया और बातचीत की। इस दौरान तथाकथित ऊंची जाति के लोगों ने उच्च न्यायालय के आदेश को मानने से इनकार कर दिया।

उन्होंने दोहराया कि वे दलितों को आम रास्ते से शव ले जाने की इजाजत नहीं देंगे। प्रशासन ने भी तथाकथित ऊंची जाति के अडिय़ल रुख के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की बजाय उनका तुष्टिकरण किया। उन्होंने एक नया रास्ता बनवाया और उससे दलितों को शव ले जाने को कहा।

दलितों ने प्रशासन के फरमान का विरोध किया और नए रास्ते से शव ले जाने से मना किया। हालांकि पुलिस ने उनकी बातों पर बिल्कुल ही ध्यान नहीं दिया। दलितों ने अपनी मांग मनवाने के लिए आत्मदाह का भी प्रयास किया। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन कर रहे दलितों को गिरफ्तार कर लिया।

प्रशासन दलितों की गिरफ्तारी तक ही नहीं रुका, उसने पुलिस का इस्तेमाल कर चेल्लामुथु का शव उठवाया और नए बने रास्ते से ले जाकर दफना दिया।

तथाकथित ऊंची जाति के लोगों ने आदेश न मानकर उच्च न्यायलय की अवहेलना की, लेकिन सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की। थिरुनालकोंडाचेरी गांव का ये मामला तमिलनाडु का इकलौता मामला नहीं है।

पिछले साल जुलाई में अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय आयोग दलितों पर अत्याचार की सूची जारी की थी, जिसमें तमिलनाडु पांचवें स्थान पर था। आंकड़ों के अनुसार, 2011 से जुलाई, 2015 तक तमिलनाडु में 213 दलितों की हत्या हुई थी।

Comments

Leave a Reply


Advertisement