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आप सांसद भगवंत मान के लोकसभा हलके में दलितों का बॉयकाट


Updated On: 2017-08-04 12:14:20 आप सांसद भगवंत मान के लोकसभा हलके में दलितों का बॉयकाट

पंजाब का लोकसभा क्षेत्र संगरूर दलित उत्पीडऩ को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। यहां के गांव धंदीवाल में दलितों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया है। कारण, जमींदारों के खेतों में काम करने वाले दलित मजदूरों ने मजदूरी 250 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये करने की मांग की थी।

12-12 घंटे काम के बाद मिलने वाली 250 की दिहाड़ी से दलितों के घर का गुजारा मुश्किल हो रहा था। ऐसे में जब उन्होंने प्रभावशाली वर्ग के जमींदारों से दिहाड़ी बढ़ाने की अपील की तो उनका गांव में सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, दलितों ने कहा कि गांव में अनाउंसमेंट करके बॉयकाट की बात कही गई है। दलितों को जमींदारों के खेतों में काम देने पर पाबंदी लगा दी गई है। दुकानों से दलितों के सामान खरीदने व दलितों को दूध आदि देने पर भी रोक लगा दी गई। दलितों को जो भी काम देगा, उस पर 5 हजार रुपये जुर्माना करने की घोषणा कर दी गई। यह मामला 20 जुलाई का है, लेकिन चर्चा में अब आया है।

रिपोट्र्स के मुताबिक, जमींदारों द्वारा बहिष्कार किए जाने के बाद अगले दिन 21 जुलाई को दलितों ने डिप्टी कमिश्नर संगरूर के ध्यान में यह मामला लाया था, जिन्होंने एसडीएम को मामले की जांच सौंपी थी, लेकिन प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेने की बजाय 12 दिन बाद जाकर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए बुलाया। हालांकि तब भी मामला सुलझ नहीं पाया। वहीं डीसी अमरप्रताप सिंह विर्क का कहना है कि जल्द ही मामले का समाधान निकाल लिया जाएगा।

गांव की कुल आबादी करीब 2500 है, जिनमें से 500 दलित हैं। आर्थिक तौर पर बेहद कमजोर इन वर्गों के लोगों की सामाजिक बहिष्कार के बाद हालत और खराब हो गई है।

गांव के दलित परिवारों में से पंच रणजीत सिंह, गुरप्रीत, जीत सिंह, नायब सिंह आदि ने मीडिया को बताया कि जमींदारों के खेतों में 12 घंटे काम करने पर पुरुषों को 250 रुपये व महिलाओं को सिर्फ 220 रुपये दिहाड़ी मिलती है। महंगाई के इस दौर में इतने कम पैसे से घर का गुजारा नहीं होता। ऐसे में उन्होंने दिहाड़ी 300 रुपये करने की मांग की तो बदले में उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।

गांव में यह लड़ाई अब जातिवाद में बदलती जा रही है। जमींदार अब दलितों को अपने क्षेत्र से गुजरने नहीं दे रहे। स्टेडियम में दलित बच्चों को जाने नहीं दिया जा रहा। गुरुद्वारों के कार्यक्रम में भी उन्हें दाखिल नहीं होने दिया जा रहा।

काम न मिलने के कारण दलितों को खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं। घरों में राशन नहीं है तो दुकानदारों ने उधार राशन देने से इनकार कर दिया है। घरों में रखे पशुओं को चारा नहीं मिल पा रहा है।

इस मामले में प्रशासन की ढिलाई तो देखने को मिल ही रही है, साथ ही राजनीति बेरुखी भी साफ नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब प्रधान व सांसद भगवंत मान संगरूर लोकसभा हलके का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन वह अपने ही क्षेत्र में पड़ते गांव धांदीवाल में दलितों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार जैसी बड़ी घटना पर चुप्पी साधे हुए हैं।

आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान दलितों से कई वायदे किए थे। उनमें से एक वायदा प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद किसी दलित को पंजाब का डिप्टी सीएम बनाना भी था, लेकिन चुनाव बीतने के बाद अब आम आदमी पार्टी इन्हीं दलितों पर अत्याचार के मामले में चुप है। खुलकर दलितों का समर्थन करना तो दूर की बात, अभी तक आप कन्वीनर अरविंद केजरीवाल, प्रदेश प्रधान व संगरूर के सांसद भगवंत मान की कोई प्रतिक्रिया तक भी नहीं आई है।

सोशल मीडिया पर इसे लेकर खासी चर्चा छिड़ी हुई है कि दलितों के ऐसे बुरे दौर में इसी क्षेत्र के सांसद भगवंत मान या पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल कुछ बोलते क्यों नहीं।

इससे पहले भी इसी संगरूर के गांव जलूर में अपने हिस्से की पंचायती जमीन मांगने पर दलितों ने संघर्ष किया था, जिसका जमींदारों ने विरोध किया था। इस दौरान कई दलितों पर मामले भी दर्ज हुए तो एक दलित बुजुर्ग महिला की हत्या भी हो गई। इस मामले में अभी भी इंसाफ न मिलने पर दलित संघर्ष कर रहे हैं। इस मामले में भी आम आदमी पार्टी ने दलितों से दूरी बनाकर रखी थी।

कांग्रेस, अकाली दल-भाजपा की स्थिति भी आम आदमी पार्टी से अलग नहीं है। पिछली अकाली-भाजपा सरकार के दौरान भी संगरूर में दलितों पर अत्याचार हुए थे, लेकिन तत्कालीन सरकार ने भी इन्हें इंसाफ दिलाने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई। यही स्थिति मौजूदा कांग्रेस सरकार के दौरान भी बनी हुई है। अभी तक दलितों के बहिष्कार पर कांग्रेस सरकार द्वारा कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है।

पंजाब में दलितों पर होने वाले अत्याचारों में जनप्रतिनिधियों व सरकारों की बेरुखी इस ओर इशारा करती है कि दलित सिर्फ चुनावों के दिनों में याद करने के लिए होते हैं। वोट लेकर चुनाव जीतने के बाद इनके अधिकारों व इन पर होने वाले अत्याचारों को लगभग अनदेखा ही कर दिया जाता है।

बहरहाल, बसपा ने दलितों के बॉयकाट का नोटिस लेते हुए उन्हें इंसाफ दिए जाने की मांग की है। बसपा इस मुद्दे को पंजाब में किए जाने वाले धरने प्रदर्शनों में उठाने जा रही है। बसपा के प्रदेश प्रधान रशपाल सिंह राजू कहते हैं कि दलितों-पिछड़ों के खिलाफ अकाली-भाजपा सरकार में भी अत्याचार होते थे और अब कांग्रेस सरकार में भी हो रहे हैं। अकाली-भाजपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी को दलितों-पिछड़ों से कोई लेना-देना नहीं है।

जमींदारों ने दलितों पर लगाए आरोप
गांव धांदीवाल के जमींदारों से जब मीडिया ने इस मामले संबंधी बात की तो उन्होंने बताया कि दलित कुछ संगठनों के पीछे लगकर उन्हें कानून का पाठ सिखाने लगे हैं। गांव के जमींदार गुरजंट सिंह, गुरमुख सिंह, हरदीप सिंह आदि ने कहा कि जमींदारों ने आम राय के साथ दलितों को 275 रुपये दिहाड़ी के साथ रोटी देने की बात पर सहमति दी थी, लेकिन दलित रोटी के साथ 300 रुपये दिहाड़ी मांग रहे थे। जमींदारों को दूसरे गांवों से सस्ते में लेबर मिल रही है, ऐसे में उन्हें अब कोई फर्क नहीं पड़ता।

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