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कासगंज : यहां पहली बार घोड़ाबग्घी पर सवार हुआ दलित दूल्हा


Updated On: 2018-07-16 08:17:22 कासगंज : यहां पहली बार घोड़ाबग्घी पर सवार हुआ दलित दूल्हा

उत्तर प्रदेश के कासगंज के अंतर्गत निजामपुर गांव 15 जुलाई को एक दलित दूल्हे के संघर्ष की जीत का गवाह बना। यह ऐसा पहला मौका था, जब घोड़ी पर सवार किसी दलित दूल्हे ने बारात निकाली हो। इससे पहले तक परंपरा के नाम पर उच्च जाति के लोग दलितों को घोड़ी पर चढ़ बारात निकालने नहीं दे रहे थे।

पिछले करीब 6 महीने से निजामपुर गांव देशभर में सुर्खियों में बना हुआ था। जनवरी महीने में गांव निजामपुर की शीतल की शादी सिकंदराराऊ के गांव बसई के रहने वाले अनुसूचित जाति के युवक संजय जाटव (27) के साथ तय हुई थी।

इस शादी को लेकर गांव में भारी विवाद और तनाव के हालात पैदा हो गए। वजह यह थी कि संजय चाहते थे कि वह घोड़ी पर बैठकर पूरे गांव में बारात घुमाएं। वहीं, ठाकुर समाज के लोग इस बात का विरोध कर रहे थे। ठाकुरों का कहना था कि यह गांव की परंपरा नहीं है और बेवजह जिद पकड़ कर परंपरा तोड़ गांव में बारात घुमाने की बात की जा रही है।

यह मामला पुलिस प्रशासन, मुख्यमंत्री और फिर अदालत की चौखट तक जा पहुंचा। इसे लेकर देशभर में चर्चा का माहौल गरम रहा। सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं आईं। इसके बाद जाकर प्रशासन हरकत में आया और 15 जुलाई को 150 पुलिस मुलाजिमों की सुरक्षा में दलित दूल्हे संजय की बारात गांव की गलियों से निकाली गई। इस दौरान घरों की छतों पर पुलिस मुलाजिम तैनात रहे।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, शादी हो जाने के बाद दुल्हन के परिवारवाले खुश होने के साथ-साथ दहशत में भी हैं, क्योंकि गांव के ठाकुरों ने परिजनों को देख लेने की धमकी दी है। निजामपुर गांव में 40 ठाकुर परिवार और 5 परिवार जाटव के रहते हैं। इस गांव में आज तक दलितों की बारात नहीं निकली है। दुल्हन की विदाई के बाद भी प्रशासन को राहत की सांस नहीं मिली है।

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