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एससी-एसटी बच्चों संग खाना नहीं खाते उच्च जाति वर्ग के बच्चे, घरों से लेकर आते हैं अलग बर्तन


Updated On: 2019-08-29 11:31:25 एससी-एसटी बच्चों संग खाना नहीं खाते उच्च जाति वर्ग के बच्चे, घरों से लेकर आते हैं अलग बर्तन

बच्चों को शिक्षित करने वाले स्कूल भी जाति व्यवस्था अछूते नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के बलिया में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां पढऩे वाले उच्च जाति के बच्चे अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के बच्चों के साथ बैठकर मिड डे मील नहीं खाते। वे खाना खाते समय एससी बच्चों से अलग बैठते हैं। यही नहीं, उच्च जाति के बच्चे बर्तन भी घरों से लेकर आते हैं।

खबरों के मुताबिक, रामपुर के एक प्राइमरी स्कूल में मिड डे मील दिए जाने के दौरान जातिगत भेदभाव होता है। प्राइमरी स्कूल में उच्च जाति के कुछ छात्र खाना खाने के लिए अपने घरों से बर्तन लेकर आते हैं। वे अपने बर्तनों में खाना लेकर एससी, एसटी समुदाय के बच्चों से अलग बैठकर खाना खाते हैं। बच्चों के इस भेदभाव का विडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

एक छात्र ने मीडिया को बताया कि वह अपने घर से खाने का बर्तन लाता है। उसने कहा कि स्कूल में जिस प्लेट में खाना दिया जाता है, उसमें किसी को भी खाना दिया जाता है। वे लोग उसमें खाना नहीं खा सकते हैं। इसलिए वे अपने घरों से बर्तन लाते हैं।

वहीं स्कूल प्रिंसिपल पी गुप्ता ने माना कि उच्च जाति के बच्चे घरों से थाली लेकर आते हैं और अलग बैठकर खाते हैं। वे लोग मन में भेदभाव रखते हैं। हम समझाते हैं कि सब एक समान होते हैं, लेकिन वे नहीं मानते हैं।

बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी इस मामले को उठाते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार इसे लेकर सख्त कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सरकारी स्कूल में दलित छात्रों को अलग बैठाकर भोजन कराने की खबर अति दुखदायक और निंदनीय है। ऐसे घिनौने जातिवादी भेदभाव के दोषियों के खिलाफ राज्य सरकार तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करे।

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