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CAA-NRC के खिलाफ आंदोलन को ताकतवर बना रहे 'अंबेडकर'


Updated On: 2019-12-21 09:58:43 CAA-NRC के खिलाफ आंदोलन को ताकतवर बना रहे 'अंबेडकर'

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ देश में उबाल है। इसके खिलाफ पूर्वोत्तर राज्यों से शुरू हुए प्रदर्शन देश के अन्य राज्यों में भी फैल चुके हैं। सीएए और एनआरसी के खिलाफ आगे बढ़ रहे इस आंदोलन में 'बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की मौजूदगी' इसे प्रचंड बना रही है। 

प्रदर्शन कर रहे लोगों के हाथों में दिखाई देने वाली डॉ. अंबेडकर की तस्वीरें और भारतीय संविधान की कॉपियां ये दर्शा रही हैं कि यह आंदोलन व्यापक हो चुका है। इसमें दलित-पिछड़ा समाज तो अंबेडकर-फूले की तस्वीरें लेकर शामिल हो ही रहा है, मुस्लिम समाज भी अंबेडकर की तस्वीरें हाथों में थामकर आगे बढ़ रहा है।

दिल्ली की जामा मस्जिद के बाहर 20 दिसंबर को मुस्लिम समाज की ओर से किए गए प्रदर्शन के दौरान बड़ी गिनती में इस समाज के लोगों के हाथों में अंबेडकर की तस्वीरें पकड़ी हुई थीं। इसी तरह का माहौल दिल्ली के जंतर मंतर पर सीएए-एनआरसी के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों के दौरान भी दिखाई दे रहा है।

यहां प्रदर्शन के लिए जुटने वाले लोगों के हाथों में अंबेडकर की तस्वीरें नजर आती हैं। दिल्ली के उत्तर प्रदेश भवन के बाहर 21 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में लोगों ने अंबेडकर की तस्वीरें पकडक़र संविधान बचाओ के नारे लगाए।

उत्तर प्रदेश-दिल्ली से बाहर भी ऐसा ही नजारा दिखाई देता है। बीते दिनों चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स द्वारा सीएए-एनआरसी के खिलाफ निकाले गए रोष मार्च में भी स्टूडेंट्स हाथों में डॉ. अंबेडकर के पोस्टर थामे हुए थे।

20 दिसंबर को पंजाब के जालंधर जिले समेत अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम समाज द्वारा किए गए प्रदर्शनों के बीच भी अंबेडकर की 'झलक' नजर आई। इन प्रदर्शनों के दौरान अंबेडकर के फ्लैक्स, तस्वीरें और भारतीय संविधान को बचाने के स्लोगन लिखी तख्तियां लोगों का ध्यान खींच रही थीं।

महाराष्ट्र में भी सीएए-एनआरसी के खिलाफ आंदोलन में अंबेडकर की मौजूदगी दिखाई देती है। 19 दिसंबर को यहां मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में सीएए-एनआरसी का विरोध करने बड़ी गिनती में लोग इकट्ठे हुए।

इस दौरान मुस्लिम समाज सहित अन्य वर्गों के लोगों के हाथों में अंबेडकर की तस्वीरें पकड़ी हुई थीं। महाराष्ट्र की सावित्री बाई यूनिवर्सिटी में भी स्टूडेंट्स ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन किया। यहां बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष इकट्ठे होकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया गया।

कर्नाटक के बेंगलुरु में बीते दिनों मुस्लिमों समेत अन्य वर्गों के लोगों की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रसिद्ध लेखक रामचंद्र गुहा भी पहुंचे, जिन्होंने हाथों में डॉ. अंबेडकर की तस्वीर पकड़ी हुई थी। उन्होंने सीएए-एनआरसी को भारतीय संविधान की भावना के खिलाफ बताया।

उत्तराखंड के अंतर्गत रुडक़ी के कलियर क्षेत्र में मुस्लिम समाज की ओर से 20 दिसंबर को प्रदर्शन किया गया। यहां भी तस्वीरों के रूप में डॉ. अंबेडकर की मौजूदगी दिखाई दी। इसी तरह के दृश्य कई अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहे हैं।

प्रदर्शनों के बीच बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें दिखाई देने के खास मायने हैं। दरअसल, अंबेडकर आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में एक बड़ी शख्सियत हैं। देश-दुनिया में उनके करोड़ों पैरोकार हैं। ऐसे में किसी भी आंदोलन में बाबा साहब अंबेडकर उनके अनुयायियों की मौजूदगी उसे बड़ा बना देती है।

रोहित वेमुला केस, गुजरात का उना कांड, एससी-एसटी एक्ट, रोस्टर सिस्टम, भीमा कोरेगांव आदि ऐसे मामले हैं, जो कि अंबेडकर और अंबेडकरवादियों की मौजूदगी के चलते बड़े आंदोलन बनकर उभरे। रोहित वेमुला के मामले पर गौर करें तो उनकी मौत के बाद एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वह तस्वीर रोहित वेमुला और उनके साथियों को हैदराबाद यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से निकाले जाने के दौरान की थी।

उस तस्वीर में रोहित वेमुला ने हॉस्टल से निकलते समय अपने हाथ में बाबा साहब अंबेडकर की एक बड़ी फोटो पकड़ी हुई थी। रोहित वेमुला की अंबेडकर संग उसी तस्वीर ने देश में एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया था, जिसने सरकार की हालत खराब कर दी थी।

अब सीएए-एनआरसी के खिलाफ आंदोलन में डॉ. अंबेडकर की मौजूदगी ना सिर्फ इसे बड़ा बना रही है, बल्कि सरकार की चिंता भी बढ़ाने वाली है। विश्लेषकों का मानना है कि सीएए में मुस्लिमों की अनदेखी और उस समुदाय की ओर से किया जाने वाला संभावित विरोध मोदी सरकार के लिए चिंता की बात नहीं थी, लेकिन अब इसमें बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 'दस्तक' से सत्ता डगमगाने जरूर लगी है।

(OUR VIEW)

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