Punjab

एससी वर्ग का कर्ज माफ हुआ नहीं, अब चीनी-चाय पत्ती पर भी संकट?


Updated On: 2017-07-09 13:55:36 एससी वर्ग का कर्ज माफ हुआ नहीं, अब चीनी-चाय पत्ती पर भी संकट?

चंडीगढ़। पंजाब में सरकार बदलने के बाद बनी कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने जून 2017 में अपना पहला बजट पेश किया। अनुसूचित जाति वर्ग, जो कि प्रदेश की सबसे बड़ी आबादी (करीब 32 फीसदी), को उम्मीद थी कि बजट में उनके लिए कुछ खास होगा, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी।

कांग्रेस के बजट में उन्हें कुछ खास नहीं मिला। यहां तक कि चुनाव के समय कांग्रेस ने एससी वर्ग व गरीबों के 50 हजार रुपये तक के कर्ज माफ करने का जो वायदा किया था, उसका बजट में जिक्र तक नहीं किया गया।

आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए पहले से चलाई जा रही आटा-दाल स्कीम के लाभार्थियों (अधिकतर एससी वर्ग से संबंधित) को पंजाब बजट में 1 किलो चीनी व 100 ग्राम चाय पत्ती प्रतिमाह देने का जरूर ऐलान किया गया। हालांकि यह घोषणा भी सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही है।

द ट्रिब्यिून की एक खबर के मुताबिक, पंजाब में आटा-दाल स्कीम के 1.41 करोड़ लाभार्थी हैं। कांग्रेस के बजट में इन सभी को चीनी व चाय पत्ती प्रतिमाह देने की घोषणा की गई, लेकिन अब वित्त विभाग प्रदेश की आर्थिक मंदहाली का हवाला देते हुए इससे हाथ पीछे खींच रहा है।

खबर के मुताबिक, पंजाब सरकार के वित्त विभाग ने सिफारिश की है कि सिर्फ केंद्र सरकार की अंत्योदय स्कीम (अति गरीब) के लाभार्थियों को ही चीनी व चाय पत्ती का लाभ दिया जाए, जो कि कुल लाभार्थियों का सिर्फ एक तिहाई ही हैं।

यह भी कहा जा रहा है कि जिन लाभार्थियों को चीनी-चाय पत्ती देने के लिए चुना जाएगा, उन्हें भी यह सीधे तौर पर बांटी नहीं जाएगी। उन्हें प्रतिमाह 1 किलो चीनी व 100 ग्राम चाय पत्ती के पैसे मिलेंगे। वे भी सीधे तौर पर नहीं, बल्कि लाभार्थियों को स्मार्ट कार्ड के जरिये ट्रांसफर किए जाएंगे।

बहरहाल, इस संबंध में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री की ओर से लिया जाएगा, लेकिन इतना जरूर तय है कि पंजाब के आर्थिक तौर पर कमजोर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों की राह आसान नहीं है। बेरोजगारी, कर्ज की मार, गरीबी जैसी समस्याओं से वे आज भी उसी तरह जूझ रहे हैं, जैसे कि पिछली अकाली-भाजपा सरकार के दौरान जूझते थे।

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