Punjab

अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को परीक्षा में अब नहीं मिलेंगे अतिरिक्त अवसर


Updated On: 2019-07-31 11:04:09 अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को परीक्षा में अब नहीं मिलेंगे अतिरिक्त अवसर

भाजपा सरकारों के शासन में दलितों-पिछड़ों के अधिकारों को छीने जाने के आरोप लगते रहे हैं। विपक्षी पार्टियां यूनिवर्सिटियों में 13 प्वॉइंट रोस्टर सिस्टम, एससी-एसटी एक्ट और दलितों-पिछड़ों को आरक्षण का पूरा लाभ ना मिल पाने जैसे मुद्दों को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधती रही हैं। अब इसी तरह के सवालों के घेरे में कांग्रेस भी है। 

पंजाब की कांग्रेस सरकार ने एक ऐसा फैसला किया है, जिससे प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों में इस सरकार के खिलाफ रोष देखने को मिल रहा है। स्थानीय खबरों के मुताबिक, प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने पीसीएस ज्यूडीशियल परीक्षा के संबंध में बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अब अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को परीक्षा देने के लिए मिलने वाले मौके सीमित कर दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने पीसीएस ज्यूडीशियल की परीक्षा प्रणाली में बदलाव किया है। इसके तहत अब अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को पीसीएस ज्यूडीशियल परीक्षा में भाग लेने के लिए अब सिर्फ 4 अवसर ही मिलेंगे, जबकि इससे पहले निर्धारित उम्र तक ये उम्मीदवार हर साल परीक्षा दे सकते थे।

मतलब, अगर परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार की उम्र 21 से 35 वर्ष के बीच रखी गई है तो अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार इस समय के बीच प्रत्येक वर्ष परीक्षा में बैठ सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उनके इन असीमित अवसरों को सीमित कर दिया गया है। अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अब सिर्फ 4 मौके ही मिलेंगे।

बताया जा रहा है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने यह फैसला चुपचाप लिया है। इस संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पहले जानकारी भी नहीं दी गई। 20 अक्टूबर 2009 में पंजाब सिविल सर्विसेज नियम में बदलाव करके इस संबंधी नोटीफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।

दूसरी ओर इस फैसले को लेकर पंजाब के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों में रोष देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर उनकी ओर से इस फैसले संबंधी पोस्ट शेयर करते हुए इसकी निंदा की जा रही है।

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