Punjab

दलित महिला को उल्टा लटकाकर रॉड से पीटता रहा चौकी इंचार्ज


Updated On: 2017-09-10 08:27:41 दलित महिला को उल्टा लटकाकर रॉड से पीटता रहा चौकी इंचार्ज

पंजाब देश में सबसे अधिक दलित आबादी (फीसदी के मुताबिक) वाला प्रदेश है, लेकिन इतनी आबादी के बावजूद यहां दलित उत्पीडऩ की घटनाएं चरम पर हैं।

यहां के बटाला क्षेत्र में दलित उत्पीडऩ की घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। आरोप है कि यहां पुलिस चौकी में एक दलित महिला को उल्टा लटका कर लोहे की रॉड से बेरहमी से पीटा गया। अब उसकी यह हालत हो गई है कि वह न तो चल पा रही है और न ही बोल पा रही है।

दैनिक भास्कर की एक खबर के मुताबिक, बटाला के गिल गांव में रहने वाले 17 साल के शंटी ने कहा कि गांव के ही दीपा सिंह के यहां शादी थी। इस पर दीपा के परिवार ने उसकी मां कुलदीप कौर को घरेलू काम करने के लिए एक महीने के लिए रखा था।

इसी बीच 28 अगस्त को दीपा के परिवार ने आरोप लगा दिया कि कुलदीप कौर ने उनके यहां से 1.70 लाख रुपये चुराए हैं, जबकि कुलदीप कौर बार-बार खुद को बेकसूर बताती रही।

शंटी ने आरोप लगाया कि इसी मामले को लेकर दयालगढ़ चौकी का इंचार्ज सुखविंदर सिंह सुक्खा उसे और उसकी मां को रात 2 बजे घर से उठाकर चौकी ले गया। यहां पहले उसे और फिर उसकी मां कुलदीप कौर को पीटा गया।

शंटी ने आरोप लगाया कि चौकी इंचार्ज ने उसके सामने मां कुलदीप कौर को उल्टा लटका कर पीटा। जब मां बेहोश हो जाती तो चौकी इंचार्ज सुखविंदर सुक्खा उसे नीचे उतारकर पानी पिलाता और होश में लाकर फिर पीटने लगता।

चौकी इंचार्ज उसकी मां से जबरदस्ती चोरी कबूल करवाना चाहता था, जबकि उसकी मां ने चोरी नहीं की थी। शंटी के मुताबिक, उसके सामने चौकी इंचार्ज सुखविंदर सिंह उसकी मां कुलदीप कौर के पीछे और छाती पर लोहे के डंडे मारता रहा। जब उसने मां के लिए रहम की भीख मांगी तो चौकी इंचार्ज ने उसे भी टॉर्चर किया।

जुल्म का यह सिलसिला 6 घंटे तक चलता रहा। इसके बाद उसकी मां की हालत बिगड़ गई तो चौकी इंचार्ज ने उसे छोड़ दिया। हालांकि इसके साथ ही धमकाते हुए यह भी कह दिया कि अगर इस बारे में कहीं शिकायत की तो झूठे केस में फंसा दूंगा।

यह घटना 28 अगस्त की है, लेकिन मीडिया में अब इसका खुलासा हुआ है। बताया जाता है कि कुलदीप कौर करीब एक सप्ताह से अस्पताल में दाखिल है, जहां वह न बोल पा रही है और न ही चल पा रही है।

इस घटना का एक अमानवीय पहलू और भी रहा। शंटी के मुताबिक, घटना के अगले दिन 29 अगस्त को जब वे कुलदीप कौर को अस्पताल लेकर गए तो वहां उसे दाखिल नहीं किया गया। आरोप है कि चौकी इंचार्ज ने एक नेता को फोन किया, जिसने आगे अस्पताल में फोन करके महिला को दाखिल न करने के लिए कहा।

महिला की हालत बिगडऩे पर 2 सितंबर को उसे किसी तरह अस्पताल में दाखिल किया गया, लेकिन न तो उसकी फाइल बनी और न ही इलाज शुरू हुआ। बाद में 7 सितंबर को सिविल सर्जन के दखल के बाद इलाज शुरू हुआ।

वहीं चौकी इंचार्ज सुखविंदर सिंह ने मीडिया से कहा कि कुलदीप कौर पर गांव के एक परिवार ने चोरी का आरोप लगाया था। उसने कुलदीप कौर को चौकी बुलाया था, लेकिन उससे पीटा नहीं। एसएसपी उपिंदरजीत सिंह घुम्मन ने मीडिया से कहा कि मामले की जांच करवा कर कार्रवाई की जाएगी।

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