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अत्याचारी सिस्टम से मुक्ति पानी है तो सत्ता के जरिये सामाजिक परिवर्तन लाना होगा


Updated On: 2016-11-18 00:51:47 अत्याचारी सिस्टम से मुक्ति पानी है तो सत्ता के जरिये सामाजिक परिवर्तन लाना होगा

कैलिफोर्निया (अमेरिका)। भारतीय संविधान नागरिकों को शोषण से मुक्ति का अधिकार देता है। फिर भी दलित-पिछड़े वर्गों के लोग रोजाना भेड़-बकरियों की तरह काट दिए जाते हैं। उनके कत्ल होते हैं। अनगिनत अत्याचार होते हैं। शोषित समाज की बेटियों से बलात्कार होते हैं। सिखों के खिलाफ 1984 में जो कुछ हुआ, वैसे अत्याचार दलितों-पिछड़ों के साथ रोजाना होते हैं। जब तक सत्ता के जरिये सामाजिक व्यवस्था परिवर्तन नहीं होगा, तब तक ये जुल्म होते रहेंगे।

ये विचार अमेरिका के फ्रेजनो गुरुघर में जुटे उन एनआरआई बुद्धिजीवियों के थे, जो कि भारत में शोषित समाज पर होने वाले जुल्मों को लेकर काफी चिंतित नजर आए। बसपा संस्थापक साहब कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में रखे गए समारोह में इक्ट्ठे हुए इन एनआरआइज ने जोर देते हुए कहा कि सत्ता की चाबी से ही शोषित समाज की सभी मुश्किलें दूर हो सकती हैं।

एनआरआई व समाज सेवक अमर दड़ौच ने अपनी बात रखते हुए कहा कि दबे-कुचले वर्गों पर सदियों से जुल्म हो रहा है। साहब कांशीराम का मानना था कि असमानता, अत्याचार व भेदभाव वाली सामाजिक व्यवस्था तब तक बनी रहेगी, जब तक कि लोग इसके अधीन रहेंगे। इस शोषणकारी सामाजिक व्यवस्था को बदलने के लिए साहब कांशीराम ने अपनी सारी जिंदगी लगा दी।

साहब कांशीराम ने वही लड़ाई लड़ी, जो कि हमारे संतों-महापुरुषों ने लड़ी थी। जब संत-महापुरुष सदियों से चली आ रही जालिम व गैरबराबरी वाली व्यवस्था के खिलाफ लड़ रहे थे, तब भी अधिकतर लोगों ने उनका साथ नहीं दिया था। ऐसे में उन्हें अपने परिवारों की जान की कुर्बानी भी देनी पड़ी।

अमर दड़ौच ने कहा कि लोग तब भी अपनी लीडरशिप के प्रति कन्फ्यूज रहे। शोषण वाली व्यवस्था को बनाए रखने वाले लोग आज भी दबे-कुचले वर्गों में उनकी असल लीडरशिप के खिलाफ कन्फ्यूजन पैदा करके उन पर राज कर रहे हैं। लीडरशिप के प्रति यह कन्फ्यूजन जातिवादी है।

पंजाब में दलितों के खिलाफ हाल ही में हुए जुल्मों का जिक्र करते हुए एनआरआई अमर दड़ौच ने कहा कि पिछले दिनों अबोहर में एक दलित नौजवान भीम टांक को जानवरों को काटने वाले हथियारों से बेहरमी से मार दिया गया। मानसा में दलित नौजवान सुखचैन सिंह का कत्ल करने के बाद हमलावर उसकी टांग काटकर साथ ले गए। संगरूर में अपने हिस्से की पंचायती जमीन मांगने पर दलितों पर जुल्म किए गए। मालवा-माझा क्षेत्र में दबे-कुचले वर्गों की हालत बहुत ज्यादा खराब है।

इन जुल्मों का कारण बताते हुए श्री दड़ौच ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि लोग अपनी लीडरशिप के प्रति स्पष्ट नहीं हैं। वे चुनाव में उन पार्टियों को चुनते आ रहे हैं, जो कि इस सामंतवादी व्यवस्था को बनाए रखना चाहती हैं। अत्याचारी व्यवस्था को बनाए रखने वाले लोग साजिश के तहत बसपा व इसकी लीडरशिप के खिलाफ भ्रम पैदा करते हैं।

बसपा लीडरशिप के खिलाफ साजिश के तहत किए जाने वाले दुष्प्रचार को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बसपा के जरिये सत्ता प्राप्त करके ही बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान को पूरी तरह से लागू किया जा सकता है और शोषण से मुक्ति पाई जा सकती है।

शोषणकारी व्यवस्था को बदलना होगा
अमर दड़ौच ने अपनी असल लीडरशिप को पहचानने पर बल देते हुए कहा कि शोषित समाज को सबसे पहले यह सोचना चाहिए कि उनके सिद्धांत पर कौन खड़ा है? जातिवादी व्यवस्था को तोडक़र कौन समानता पर आधारित व्यवस्था लागू करने की बात करता है? अत्याचार के खिलाफ कौन आवाज उठाता है? बसपा को ही असल मूवमेंट बताते हुए श्री दड़ौच ने कहा कि हमें अपना नजरिया स्पष्ट कर लेना चाहिए। विधानसभा चुनाव का समय नजदीक आ रहा है। यह जागने का समय है। अगर चूक गए तो पछतावा रह जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक शोषण करने वाली सामाजिक व्यवस्था को बदला नहीं जाता, तब तक जुल्म खत्म होने वाले नहीं हैं और ना ही लोग सुरक्षित हैं।

संविधान को सही ढंग से लागू नहीं किया गया
एनआरआई अमर दड़ौच ने कहा कि संविधान को पूरी तरह से लागू करना है तो इसमें आस्था रखने वाली बसपा को सत्ता तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायती जमीन में एससी वर्ग को आरक्षित जमीन देने की व्यवस्था की गई है, लेकिन इसे लागू नहीं किया जा रहा। यही कारण है कि संगरूर में दलितों को अपने हिस्से की जमीन लेने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

आरक्षण का पूरा लाभ नहीं दिया जा रहा है। संविधान में एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों को आरक्षण की व्यवस्था होने के बावजूद नौकरियों व अन्य क्षेत्रों में इन वर्गों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि दलितों-पिछड़ों का शोषण इसलिए नहीं होता क्योंकि वे आर्थिक तौर पर कमजोर हैं, बल्कि इसलिए होता है क्योंकि वे छोटी जाति से संबंधित हैं। पंजाब में दलितों का सबसे अधिक शोषण हो रहा है। उनके कत्ल होते हैं, उनकी बेटियों से दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं।

बसपा लीडरशिप के खिलाफ गलत प्रचार
एनआरआई अमर दड़ौच ने कहा कि जातिवादी व्यवस्था को बनाए रखने वालों ने आम लोगों में उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार द्वारा बनाए गए स्मारकों को लेकर गलत प्रचार किया। इसे पैसे की बर्बादी बताया गया, जबकि असल में ये स्मारक बहुजन समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन स्मारकों की टिकटों की बिक्री से होने वाली कमाई सरकार के खजाने में जमा होती है। इस कमाई से इन स्मारकों की लागत कुछ सालों में पूरी कर ली जाएगी।

ये स्मारक बहुजन समाज के महापुरुषों के जीवन संघर्ष से हमें अवगत करवाते हैं, उनसे प्रेरणा लेकर आगे बढऩे के लिए प्रेरित करते हैं। स्मारकों में बुत लगाए जाने का जिक्र करते हुए श्री दड़ौच ने कहा कि साहब कांशीराम का कहना था कि आज तक शोषित समाज को लीडरलेस रखा गया। उन्हें आशंका थी कि उनके जाने के बाद भी जातिवादी मानसिकता वाली व्यवस्था शोषित समाज को लीडरलेस कर देगी। इसीलिए उन्होंने ये कहा था कि उनके बुत के साथ बहन मायावती के बुत भी लगाए जाएं, ताकि समाज में लीडरशिप को लेकर किसी तरह का भ्रम पैदा ना हो।

साहब कांशीराम के जीवन से लें प्रेरणा
इस मौके पर एनआरआई हरबलास सिंह झिंगड़ ने साहब कांशीराम के जीवन संघर्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साहब ने मुसीबतों का सामना करते हुए असमानता, भेदभाव व अत्याचारी सिस्टम के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी। उन्होंने कहा कि हमें साहब कांशीराम जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए बसपा मूवमेंट को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए।

साहब ने समाज के लिए जिंदगी कुर्बान की
अपने विचार रखते हुए भाई राम सिंह ने कहा कि साहब कांशीराम ने बहुजन समाज की हालत को सुधारने के लिए अपनी सारी जिंदगी संघर्ष में लगा दी। साहब कांशीराम ने सच्चाई के मार्ग को चुना। अपने अमूल्य योगदान के लिए साहब युगों-युगों तक याद किए जाते रहेंगे।

एकजुट हो शोषित समाज
बहन मनदीप कौर ने शोषित समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि समाज को मधुमक्खियों की तरह इक्ट्ठे होना चाहिए। जब तक अलग-अलग रहेंगे, जुल्म होते रहेंगे। एकजुट होकर ही अत्याचारी सिस्टम से मुकाबला किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने पढ़ो, जुड़ो, संघर्ष करो का नारा दिया। उन्हीं से प्रेरणा लेकर साहब कांशीराम ने अपनी जिंदगी समाज के लिए लगा दी। शोषित समाज को इक्ट्ठा करने व सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए उन्होंने लगातार संघर्ष जारी रखा।

बहन मनदीप कौर ने कहा कि शोषित समाज आज गुमराह हो रहा है। राजनीतिक पार्टियां उन्हें गुमराह कर रही हैं। इसे समाज को समझने की जरूरत है। बाबा साहब अंबेडकर व साहब कांशीराम के दिखाए मार्ग पर चलते हुए बहन मायावती भी समाज को शोषण से मुक्त करवाने के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। समाज को चाहिए कि वह अपनी वोट का सही इस्तेमाल करे और अपनी सरकार बनाए।

इस मौके पर गुरदेव सिंह, राज बराड़ व हरजिंदर सिंह ढेसी ने भी अपने विचार रखे और साहब कांशीराम को याद करते हुए उनके मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

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