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कैलिफोर्निया में मनाया गया छत्रपति शाहू जी महाराज का जन्मदिवस


Updated On: 2016-07-09 21:03:49 कैलिफोर्निया में मनाया गया छत्रपति शाहू जी महाराज का जन्मदिवस

कैलिफोर्निया। विदेशी धरती पर भी बहुजन समाज के महापुरुषों के आंदोलन व उनके विचारों की गूंज सुनाई देने लगी है। इन महापुरुषों से जुड़े खास दिन अब मनाए जाने लगे हैं, उनके जीवन संघर्ष पर चर्चाएं होने लगी हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले एनआरआई इस मामले में हमेशा आगे रहते हैं।

बहुजन महापुरुष छत्रपति शाहू जी महाराज का 142वां जन्मदिन मनाने के लिए गत दिवस गुरु रविदास गुरुघर फ्रेजनो (कैलिफोर्निया) में एनआरआई इकट्ठे हुए। अमेरिकी धरती पर शाहू जी महाराज का जन्मदिवस मनाए जाने का यह पहला मौका था।

मौके पर इकट्ठे हुए एनआरआई बुद्धिजीवियों ने छत्रपति शाहू जी महाराज के जीवन संघर्ष पर विचार रखते हुए कहा कि बहुजन समाज को अपने इतिहास की जानकारी जरूर होनी चाहिए, क्योंकि इतिहास को जाने बिना भविष्य को उज्जवल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने बहुजन समाज के उत्थान के लिए यूपी के साथ-साथ पंजाब में भी बसपा का राज लाने की जरूरत पर बल दिया।

समाज सेवक व एनआरआई अमर दड़ौच ने कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज ने शोषित समाज को सबसे पहले प्रतिनिधित्व (रिजर्वेशन) लेकर दिया। 1902 में उन्होंने शोषित समाज के लिए 50 फीसदी प्रतिनिधित्व (रिजर्वेशन) की व्यवस्था की।

शिक्षा की लौ शोषित समाज तक पहुंचाने के लिए उन्होंने क्रांतिकारी कदम उठाए। इन वर्गों के बच्चों के लिए उन्होंने कोल्हापुर में हॉस्टल बनाए। कई स्कूल खोले, ताकि शोषित समाज के बच्चे भी पढ़-लिख सकें।

यह छत्रपति शाहू जी महाराज ही थे, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को विदेश पढऩे के लिए भेजा।

1919 में उन्होंने फस्र्ट इंडिया एक्ट के तहत शोषित समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व (रिजर्वेशन) प्रदान किया। गरीबों-शोषितों के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने के लिए उन्होंने 1906 में स्पिनिंग मिल शुरू की।

श्री दड़ौच ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि भारतीय धरती पर कुछ तथाकथित ऊंची जाति के लोग शोषित समाज को मिले प्रतिनिधित्व (रिजर्वेशन) का विरोध कर रहे हैं। इसे किसी भी कीमत पर सही ठहराया नहीं जा सकता।

अंग्रेजों को शोषित भारतीय समाज के अधिकारों के हिमायती बताते हुए उन्होंने कहा कि असल में अगर अंग्रेज भारत में न आते तो आज शोषितों की जिंदगी और भी खराब होती। उन्होंने कहा कि लॉर्ड मेकाले ने 1835 में भारत में सबको पढऩे का बराबर हक दिया। इसी के तहत ज्योतिबा राव फूले जी भी पढ़ सके।

मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में पास होने के लिए 33 फीसदी नंबर की व्यवस्था की पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए एनआरआई अमर दड़ौच ने कहा कि 1856 में मद्रास यूनिवर्सिटी में मेडिकल-इंजीनियरिंग व अन्य विषयों में पास होने के लिए 40 फीसदी नंबर अनिवार्य होते थे। तब इस यूनिवर्सिटी में पढऩे वाले तथाकथित ऊंची जाति के लगभग सभी विद्यार्थी फेल हो गए। उनमें से कई के नंबर 30 से 39 फीसदी के बीच थे।

तथाकथित ऊंची जाति के लोगों ने तब अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन शुरू किया और मांग की कि पास फीसदी 40 से कम करके 33 फीसदी किया जाए। इसके बाद से 33 फीसदी नंबर (थर्ड डिवीजन) वालों को पास किए जाने की व्यवस्था लागू हुई। श्री दड़ौच ने कहा कि जो लोग आज दलितों-पिछड़ों के 33 फीसदी नंबर लेने पर सवाल उठाते हैं, उन्हीं के वर्ग के लोगों ने तब यह व्यवस्था लागू करवाई थी।

श्री दड़ौच ने कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज द्वारा लागू की गई प्रतिनिधित्व (रिजर्वेशन) व्यवस्था की तर्ज पर बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत में 340 धारा के तहत ओबीसी को सबसे पहले प्रतिनिधित्व लेकर दिया। इसके बाद 341 व 342 के तहत एससी-एसटी को प्रतिनिधित्व लेकर दिया गया।

मौजूदा समय में भारत में दलितों-पिछड़ों के साथ होने वाली भेदभाव की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए अमर दड़ौच ने कहा कि शिक्षा से लेकर खेल तक हर क्षेत्र में इन वर्गों के लोग प्रताडि़त होते हैं।

उडऩ परी के नाम से जानी जाती पीटी ऊषा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दलित वर्ग से संबंधित इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने 100-200 मीटर दौड़ में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए और अनगिनत मेडल जीत कर देश का नाम रौशन किया। इसके बावजूद जब भारत रत्न देने की बात आई तो पीटी ऊषा को दरकिनार कर क्रिकेट सचिन तेंदुलकर को चुन लिया गया।

भारत में लोगों के आर्थिक हालात पर विचार रखते हुए अमर दड़ौच ने कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 75 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो रोजाना सिर्फ 90 रुपये कमाते हैं। ऐसे में इनकी खराब आर्थिक स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर शोषित समाज के लोग बुरे हालात से बाहर निकलना चाहते हैं तो उन्हें सही आंदोलन के साथ खड़े होना होगा। वे उस आंदोलन के साथ जुड़ें, जो कि उनके अधिकारों के लिए लड़ता हो। दूसरों का साथ देने की बजाय शोषित समाज को साहब कांशीराम जी की मूवमेंट के साथ चलना चाहिए।

जो आपकी जड़ें काट रहे हैं, उनके पीछे न चलें : हरबलास सिंह झिंगड़
अपने विचार रखते हुए एनआरआई हरबलास सिंह झिंगड़ ने कहा कि शोषित समाज के लिए यह चिंता का विषय है कि जिन्होंने उनका भला नहीं किया, वे उन्हीं को पूजते हैं। जो लोग हमारी जड़ें काटने में लगे हुए हैं, हम उन्हीं के पीछे लगे हुए हैं।

शोषित समाज को बहुजन महापुरुषों को याद करने की नसीहत देते हुए श्री झिंगड़ ने कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज ने जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

भूख से बिलखते गरीबों को देख उन्होंने अपने शासन में खाद्य पदार्थों की सस्ते रेट पर कई दुकानें खुलवाईं। यहां गरीबों को खाने-पीने की चीजें सस्ती कीमत पर उपलब्ध करवाई गईं। मौजूदा समय के हुक्मरानों का जिक्र करते हुए झिंगड़ ने कहा कि यह गंभीर विषय है कि आज के समय भारत में रोजाना करोड़ों लोग भूखे पेट सोने को मजबूर हैं।

एनआरआई हरबलास सिंह झिंगड़ ने लोगों से अपील की कि वे अपने अच्छे भविष्य के लिए बहुजन समाज की मूवमेंट व साहब कांशीराम जी के आंदोलन बसपा से जुड़ें।

बहुजन महापुरुषों के सपनों का राज लेकर आए शोषित समाज : मनदीप कौर

एनआरआई मनदीप कौर ने कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज ने छोटी जाति के लोगों को हक दिलाने के लिए हमेशा आवाज उठाई। इसके लिए उन्हें कई बार तथाकथित ऊंची जाति के लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसकी कोई परवाह नहीं की।

छत्रपति शाहू जी महाराज ने कई स्कूल खोले, जिनके जरिये छोटी जाति के लोगों में शिक्षा का प्रसार किया। वह ऐसी शासन व्यवस्था चाहते थे, जिसमें सभी खुशहाल हों। वह गैरबराबरी वाली व्यवस्था का खात्मा चाहते थे। वह जाति व्यवस्था को तोडऩा चाहते थे। इसी के तहत उन्होंने इंटर कास्ट मैरिज के लिए कानून पास किया।

मनदीप कौर ने कहा कि बहुजन समाज के अन्य महापुरुषों की तरह साहब कांशीराम ने भी अपना सारा जीवन शोषित समाज के लिए लडऩे में लगा दिया। शोषित बहुजन समाज की भी जिम्मेवारी बनती है कि वह बहुजन महापुरुषों के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए उनके सपनों का राज लेकर आए।

उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश में शोषित समाज के कल्याण के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया। अगर पंजाब में भी बसपा का राज स्थापित हो जाता है तो यहां के लोगों के भी हालात कहीं अधिक बेहतर हो सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि लोग अपने वोट का सही इस्तेमाल करें और पंजाब में भी बसपा की सरकार लेकर आएं।

इस समारोह को कई अन्य एनआरआई बुद्धिजीवियों ने भी संबोधित किया और अपने बहुमूल्य विचार सांझे किए।

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