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अमेरिका से बहुजनों को संदेश-एकजुट हो जाओ, हमारी जीत को कोई रोक नहीं सकता


Updated On: 2017-05-27 00:00:33 अमेरिका से बहुजनों को संदेश-एकजुट हो जाओ, हमारी जीत को कोई रोक नहीं सकता

कैलिफोर्निया (अमेरिका)। बहुजन समाज के ऐसे हजारों लोग हैं, जो कि विदेशी धरती पर रहकर भी भारत में अपने समाज, महापुरुषों से गहरा जुड़ाव रखते हैं। भारत में बहुजन समाज पर होने वाले अत्याचार उन्हें पीड़ा देते हैं तो बहुजन महापुरुषों के विचार आगे बढऩे की प्रेरणा। इन्हीं बहुजन समाज के महापुरुषों से जुड़े खास दिन अब विदेशी धरती पर खूब मनाए जाने लगे हैं। खासतौर पर आधुनिक भारत के निर्माता, शोषित बहुजन समाज के मसीहा बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर से संबंधित विशेष दिवस पर व्यापक स्तर पर आयोजन होने लगे हैं।

कुछ इसी तरह का आयोजन हुआ अमेरिका की धरती पर, जहां बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्मदिवस मनाने के लिए एनआरआइज बुद्धिजीवी इकट्ठे हुए। कैलिफोर्निया के फ्रेजनो स्थित गुरुघर में जन्मदिवस समागम में पहुंचे एनआरआइज ने एक स्वर में भारतीय बहुजन समाज से एकजुट होकर सत्ता अपने हाथों में लेने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने अंबेडकर को जिंदा रखने के लिए अंबेडकरवाद को फैलाने की जरूरत पर भी बल दिया।

समागम के दौरान एनआरआइज भारत में शोषित बहुजन समाज पर होने वाले अत्याचारों को लेकर चिंतित नजर आए। खासतौर पर उन्होंने सहारनपुर में दलितों पर हुए जुल्म पर गहरा दुख व्यक्त किया। साथ ही कहा कि अगर इन अत्याचारों से पक्के तौर पर मुक्ति प्राप्त करनी है तो बहुजनों को सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेनी होगी।

बहुजन मूवमेंट के लिए हमारी कोशिशें कभी रुकनी नहीं चाहिएं : अमर दड़ौच
समाज सेवक व एनआरआई अमर दड़ौच ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर हमें बाबा साहब अंबेडकर को जिंदा रखना है तो उनके विचारों को आगे बढ़ाना होगा। हम भारत के मूलनिवासी हैं और हमें अपना मूल पहचानना चाहिए।

जातिवादी व्यवस्था को समाज को बांटने वाला बताते हुए श्री दड़ौच ने कहा कि मनुवादी व्यवस्था ने समाज को 6743 जातियों में बांटा है, ताकि हम बंटे रहें। इन जातियों को इकट्ठा कर पाना मुश्किल लक्ष्य है, लेकिन असंभव नहीं है।

बसपा को बहुजन समाज का असल राजनीतिक मंच बताते हुए एनआरआई अमर दड़ौच ने कहा कि ईवीएम में धांधली के चलते हमारी हार हुई है, लेकिन हमें निराश नहीं होना है। हम बेशक कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन हमारी कोशिशें कभी रुकनी नहीं चाहिएं।

बाबा साहब अंबेडकर के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि -आपकी कोशिशें सफल हों या ना हों, आपके काम की चाहे कोई सराहना करे या ना करे, चाहे आपको सफलता मिले या ना मिले, आपको अपना काम करते रहना चाहिए। जब इंसान सही रास्ते पर चलकर अपनी योग्यता साबित करता है, तब विरोधी भी आपका सम्मान जरूर करते हैं।

हाल ही में विधानसभा चुनाव के दौरान अपने पंजाब दौरे का अनुभव साझा करते हुए अमर दड़ौच ने कहा कि उन्हें वहां ऐसे कई लोग मिले, जिन्हें बहुजन मूवमेंट के लिए संघर्ष करते हुए लंबा समय बीत चुका है। बसपा के रूप में बहुजन मूवमेंट को आगे बढ़ाने के लिए उनकी कोशिशें जारी हैं। वैसे भी जो लोग बहुजन समाज के महापुरुषों की विचारधारा को समझ लेते हैं, वे कभी रुकते नहीं हैं।

एनआरआई अमर दड़ौच ने कहा कि बाबा साहब का विचार था कि जब तक विपक्ष मजबूत नहीं होगा, तब तक लोकतांत्रिक व्यवस्था कामयाब नहीं होगी। हमें विपक्ष के तौर पर मजबूत भूमिका निभानी होगी। भारत में हमारे महापुरुषों की विचारधारा के उलट हो रहा है। हमें इस स्थिति का मजबूती से सामना करना है।

अछूत का कलंक तभी मिटेगा, जब हम राजसत्ता प्राप्त करेंगे : राजगुरु

एनआरआई राजगुरु ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस की बधाई देते हुए कहा कि बाबा साहब ने अपना सारा जीवन शोषित समाज के लिए लगा दिया। बाबा साहब अंबेडकर ने शोषित बहुजन समाज को अधिकार लेकर दिए, जिनकी बदौलत हम पढ़-लिख सके। प्रतिनिधित्व (रिजर्वेशन) लेकर दिया, जिसके चलते हमें नौकरियां मिल सकीं। बराबरी का हक लेकर दिया।

बाबा साहब ने विदेश में जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त की, लेकिन पढ़-लिखकर भी उनके माथे पर लगा अछूत का कलंक नहीं मिट पाया। तब उन्होंने महसूस किया कि शोषित समाज यह कलंक तब तक माथे से नहीं उतार सकता, जब तक वह राज सत्ता प्राप्त नहीं कर लेता।

जातिवाद पर बात रखते हुए राजगुरु ने कहा कि 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली, लेकिन शोषित समाज को मनुवाद से आजादी नहीं मिल पाई। मनुवाद से मुक्ति के लिए बाबा साहब अंबेडकर ने मूलमंत्र दिया था-पढ़ो, संगठित हो और संघर्ष करो। हम पढ़-लिख तो गए, लेकिन संगठित नहीं हो पाए।

राजगुरु ने कहा कि पंजाब में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की आबादी करीब 40 फीसदी है, लेकिन फिर भी हमारी सरकार नहीं बन पाई है, हमारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाया है। दूसरी तरफ, जिनकी आबादी मात्र 15 फीसदी है, उनकी सरकारें बन रही हैं, क्योंकि उनकी सोच एक है।

उन्होंने कहा कि वह सलाम करते हैं साहब कांशीराम को, जिनकी बदौलत हम बाबा साहब अंबेडकर के जन्मदिवस मनाने के काबिल हो पाए हैं। उन्होंने अपनी सारी जिंदगी समाज के लिए लगा दी। हमें भी अपनी सोच को बदलने की जरूरत है। हमें एकजुट होना होगा। समाज की कमियों को दूर करना होगा। राजसत्ता को अपने हाथ में लेना होगा।

बाबा साहब की विरासत को बचाए रखने के लिए सोचना होगा : मलकीत बंगड़
एनआरआई मलकीत सिंह बंगड़ ने विचार रखते हुए कहा कि लोकतंत्र की सफलता तभी होगी, जब चुनावी सिस्टम में धनाढ्य लोग ना हों। उन्होंने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ईवीएम हेराफेरी को लेकर भी चिंता व्यक्त की।

बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पंजाब दौरे का जिक्र करते हुए श्री बंगड़ ने कहा कि 27 अक्टूबर 1951 को बाबा साहब जालंधर गए थे। पंजाब भर से लाखों लोग आए, जिन्हें बाबा साहब ने संबोधित किया। अगले दिन वह डीएवी कॉलेज जालंधर में गए। यहां उन्होंने विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक सिस्टम को बरकरार रखने के लिए महत्वपूर्ण बिंदु बताए।

बाबा साहब ने कहा-लोकतांत्रिक सिस्टम तभी बचा रह सकता है, जब विपक्ष मजबूत होगा। वह मजबूत ना हुआ तो सत्ताधारी पार्टी मनमर्जी करेगी। लोकतंत्र की सफलता तभी होगी, अगर चुनावी सिस्टम में धनाढ्य लोग काबिज नहीं होंगे। बाबा साहब ने नौजवानों से कहा कि तुम्हारा वोट तुम्हारा हथियार है। इस हथियार को दूसरे के हाथों इस्तेमाल ना होने दें, अगर ऐसा हुआ तो देश फिर से गुलाम हो सकता है।

श्री बंगड़ ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब बाबा साहब अंबेडकर हमें वोट का अधिकार दिलाकर संसद से बाहर आ रहे थे तो बहुत खुश थे। तब उन्हें देखकर एक अलग विचारधारा के व्यक्ति कृपलानी ने सवाल पूछा कि आज आप बहुत खुश नजर आ रहे हो, क्या बात है। इस पर बाबा साहब ने जवाब दिया कि आज लोगों को वोट डालने का अधिकार मिल गया है। कृपलानी ने कहा इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके लोगों को वोट का अधिकार मिल गया, आपके लोग तो हर समय बिक जाते हैं। तब बाबा साहब ने जवाब देते हुए कहा कि जिस दिन मेरे लोगों को वोट की कीमत का पता लग गया उस दिन वे इस देश के शासक बनेंगे।

एनआरआइ श्री बंगड़ ने कहा कि बसपा बहुजन समाज की पार्टी है। यह आपसे कुछ नहीं मांगती, सिर्फ आपसे आपका वोट मांगती है। अब यह शोषित बहुजन समाज को सोचना है कि उसे बाबा साहब की विरासत को कैसे बचाए रखना है।

बाबा साहब ने शोषित समाज को नया जीवन दान दिया : हरबलास झिंगड़
एनआरआई हरबलास सिंह झिंगड़ ने बाबा साहब अंबेडकर के जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज अगर हम आगे बढ़ सके हैं तो यह सिर्फ बाबा साहब की बदौलत ही है।

बाबा साहब के आने से पहले भारत में शोषित समाज के लिए हालात बहुत खराब थे। अछूतों की स्थिति जानवरों से भी बदतर थी। जानवर तालाबों से पानी पी सकते थे, लेकिन शोषित समाज के लोगों को यह मंजूरी नहीं थी।

बाबा साहब ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद शोषित समाज के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्होंने शोषितों को अधिकार दिलाए। संविधान के जरिये उन्हें समानता का अधिकार दिया। आगे बढऩे के बराबर अवसर दिए। बाबा साहब ने शोषितों को एक नया जीवन दान दिया।

हरबलास सिंह झिंगड़ ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि शोषित समाज के लोग बाबा साहब की पूजा तो करने लग गए, लेकिन उनकी बात नहीं मानी। पढ़ो, संगठित होकर संघर्ष करो के उनके संदेश को पूरी तरह अमल में नहीं लाया गया।

एनआरआई झिंगड़ ने कहा कि देश में शोषित समाज की बड़ी तादाद होने के बावजूद वे टुकड़ों में बंटे हैं। उनके घरों में आग लगाई जा रही है, उनके कत्ल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई किसी को अधिकार नहीं देता है, अधिकार छीनने पड़ते हैं। बाबा साहब ने कहा है कि आपके सभी दुखों का समाधान राजसत्ता की चाबी है, जिससे सभी ताले खोले जा सकते हैं।

शोषित समाज को अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चलना होगा : जसवीर मम्मन
एनआरआई जसवीर मम्मन कहा कि आज हम बाबा साहब अंबेडकर की बदौलत ही अपने पैरों पर खड़े हो पाए हैं। पहले जातिवादी व्यवस्था के चलते हम घर से बाहर भी नहीं निकल पाते थे। अछूतों की परछाई ऊंची जाति के व्यक्ति पर ना पड़ जाए इसके चलते उन्हें दिन के समय घरों से बाहर निकलने की भी आजादी नहीं थी।

बाबा साहब अंबेडकर बहुजन समाज को जो संदेश देकर गए हैं, समाज को उसके मुताबिक चलना चाहिए। बाबा साहब ने बौद्ध धर्म अपनाया। अगर बहुजन समाज इस धर्म की पहली चार प्रतिज्ञाओं पर ही अमल कर ले तो उनकी जिंदगी में बड़ा सकारात्मक बदलाव आ जाएगा।

सहारनपुर में शोषित समाज पर हुए अत्याचार का जिक्र करते हुए जसवीर मम्मन ने कहा कि हमारे समाज पर बहुत जुल्म हो रहे हैं, जो कि दुखदायक हैं।

तकदीर नहीं, बाबा साहब के कारण हुई हमारी तरक्की : राजिंदर गंगड़
एनआरआई राजिंदर गंगड़ ने एक छोटी सी कविता के जरिये बताया कि आज अगर शोषित बहुजन समाज आगे बढ़ पाया है तो यह सबकुछ बाबा साहब अंबेडकर की मेहनत का फल है, ना कि किसी तकदीर का।

शोषित समाज के बच्चे अगर पढ़ रहे हैं, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, बड़े-बड़े पदों पर नौकरियां कर रहे हैं तो यह सबकुछ बाबा साहब की देन है। यह किसी भगवान ने नहीं दिया। बाबा साहब की बदौलत ही महिलाओं को अधिकार मिले हैं और करोड़ों लोगों को संवैधानिक अधिकार मिलने से उन्हें आजादी मिल पाई है।

उन्होंने कहा कि जो लोग बाबा साहब का दिया खाकर भी उन्हें अनदेखा करते हैं, वे लोग अहसान फरामोश हैं। दुनिया पर बोझ हैं।

बच्चों को पढ़ाएं और बाबा साहब के बारे में बताएं : शीला महे
बाबा साहब अंबेडकर के जन्मदिवस की बधाई देते हुए शीला महे ने कहा कि बहुजन समाज को बाबा साहब की कलम पर पहरा देना होगा। समाज के बच्चों को यह पता होना चाहिए कि हमारी कौम में एक ऐसा महान यौद्धा आया था, जो कि हमें गुलामी की बेडिय़ों से मुक्ति दिला गया।

उन्होंने आह्वान किया कि लोग अपने बच्चों को पढ़ाएं, उच्च शिक्षा दिलवाएं। साथ ही उन्हें बाबा साहब के बारे में भी जरूर बताएं।

अपने बच्चों की सोच को बदलें। जब आप बाबा साहब की सोच पर पहरा देने लग जाएंगे तो फिर किसी की गुलामी करने की जररूत नहीं पड़ेगी।

आज भी बिखरे हुए हैं बहुजन समाज के लोग : मनदीप कौर
अपने विचार रखते हुए मनदीप कौर ने कहा कि आज वह जो कुछ भी हैं सब बाबा साहब की बदौलत हैं। बाबा साहब ने कहा था कि पढ़-लिखकर नौकरी प्राप्त करना ही हमारा लक्ष्य नहीं है। समाज के प्रति जिम्मेवारी का निर्वाहन करना भी हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बहुजन समाज के लोग आज भी बिखरे हुए हैं। वे मनुवादियों का साथ दे रहे हैं, जबकि वही बहुजन समाज को कुचल रहे हैं। मनुवादी राजनीतिक पार्टियां समानता का अधिकार क्यों नहीं देतीं? वे जातिवादी व्यवस्था को खत्म करने की बात क्यों नहीं करतीं? जबकि जातिवाद के खात्मे से ही सारे झगड़े खत्म होंगे। बहुजन समाज को उठने की जरूरत है, जागने की जरूरत है।

बहुजन नायक व बसपा संस्थापक साहब कांशीराम के बारे में विचार रखते हुए मनदीप कौर ने कहा कि वह कौम के ऐसे हीरे थे, जिन्होंने अपना घर-परिवार छोड़ा, लेकिन लोग आज तक उन्हें नहीं समझ सके। चुनाव के समय लोग बिकते हैं। बाबा साहब के वोट के अधिकार के महत्व को समझ नहीं सके हैं।

बसपा के बारे में बात रखते हुए मनदीप कौर ने कहा कि पंजाब में ईवीएम हेराफेरी से हमारी हार हुई है। धोखे से हमें सत्ता में नहीं आने दिया गया। उन्हें पता है कि अगर बसपा सत्ता में आ गई तो मनुवादियों को कोई नहीं पूछेगा।

बाबा साहब के संघर्ष को दुनिया याद कर रही है : डॉ. सतनाम बंगड़
एनआरआई डॉ. सतनाम बंगड़ ने उपस्थिति जनसमूह को बाबा साहब के जन्मदिवस की बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने महिलाओं के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्हीं की बदौलत आज महिलाएं पढ़ सकी हैं, आगे बढ़ सकी हैं।

बाबा साहब के जीवन संघर्ष को आज दुनिया याद कर रही है। दूसरे देश बाबा साहब द्वारा तैयार किए गए भारतीय संविधान से प्रेरणा लेते हैं। डॉ. सतनाम ने कहा कि लोग अपने बच्चों को बाबा साहब के बारे में जरूर बताएं। उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रेरित करें।

मनुवादी व्यवस्था ने समाज को बांटकर रख दिया : प्रेम सोढी
एनआरआई प्रेम सोढी ने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर ने शोषित समाज लोगों के लिए संघर्ष किया। यहां तक कि इस दौरान उनके बच्चों की भी मौत हो गई। इसी तरह साहब कांशीराम ने समाज के लिए जीवन भर संघर्ष जारी रखा, लेकिन यह चिंताजनक है कि समाज उन्हें सही तरह से समझ नहीं पाया।

मनुवादी व्यवस्था ने समाज को बांटकर रख दिया है। प्रेम सोढी ने कहा कि मोहन दास कर्मचंद गांधी ने हमें हरिजन शब्द दिया, जो कि बहुत ही गलत है। अगर हरि हमारा नहीं तो हम उसके जन कैसे हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अनपढ़ता हमारे समाज की बड़ी कमजोरी है। इसलिए हमें अपने बच्चों को पढ़ाने पर जोर देना होगा, तभी वे अच्छा सोच सकेंगे। उन्होंने बहुजन समाज के लोगों से भाईचारा कायम करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने अपील की कि बहुजन समाज के लोग खुद को मूलनिवासी कहना शुरू करें। इससे एकजुटता बनेगी। यही हमारी पहचान है।

इन बुद्धिजीवियों के अतिरिक्त पृथीपाल मेहमी, बीबी पलविंदर कौर, प्यारा विरदी समेत अन्य वक्ताओं ने भी समागम के दौरान अपने विचार रखे और बाबा साहब अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चलने का आह्वान किया। इस मौके पर बड़ी गिनती में लोग पहुंचे हुए थे, जिन्होंने एक-दूसरे को बाबा साहब के जन्मदिवस की बधाई दी।

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