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सीएए का यूरोपीय संसद के 150 सांसदों ने किया विरोध


Updated On: 2020-01-28 08:00:24 सीएए का यूरोपीय संसद के 150 सांसदों ने किया विरोध

देश में इस समय नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर हंगामा मचा हुआ है। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी रहने वाले लोग सीएए-एनआरसी को लोकतंत्र विरोधी बताकर इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। सीएए-एनआरसी के मुद्दे पर गणतंत्र दिवस पर यूके और अमेरिका में प्रदर्शन भी हुए।

इसी क्रम में यूरोपीय संघ (यूरोपीय संसद) के 150 से अधिक सांसदों ने भी सीएए का विरोध कर दिया है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक इन सांसदों ने सीएए के खिलाफ प्रस्ताव तैयार करते हुए कहा है कि इससे भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव हो सकता है। एनआरसी के साथ मिलकर सीएए बड़ी संख्या में लोगों को नागरिकता से वंचित कर सकता है। इससे बहुत बड़ी संख्या में लोग स्टेटलैस यानि बिना नागरिकता के हो जाएंगे। उनका कोई देश नहीं रह जाएगा।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, सांसदों की तरफ से तैयार पांच पन्नों के प्रस्ताव में कहा गया कि इसे लागू करना दुनिया में बड़े मानवीय संकट को जन्म दे सकता है। दूसरी ओर भारत ने कहा कि सीएए पूर्ण रूप से हमारा आंतरिक मामला है और यूरोपीय संसद को लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए सांसदों के अधिकारों पर सवाल खड़े करने वाली कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। इधर, भारत आए यूरोपीय संघ के सदस्यों ने कहा- यूरोपीय संसद एक स्वतंत्र संस्था है। काम और बहस के मामले में इसे स्वायत्तता हासिल है। सीएए पर प्रस्ताव का मसौदा संसद के राजनीतिक समूहों ने तैयार किया है।

सांसदों ने प्रस्ताव में आरोप लगाया कि भारत सरकार द्वारा लाया गया यह कानून अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। यह कानून धार्मिकता के आधार पर भेदभाव करता है। ऐसा करना मानवाधिकार और राजनीतिक संधियों की भी अवमानना है। इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौते के अनुच्छेद-15 का भी उल्लंघन बताया गया, जिस पर भारत ने भी हस्ताक्षर किए हैं।

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