Madhya Pradesh

ऊंची जाति के घरों के आगे से गुजरते वक्त दलितों को उतारनी पड़ती हैं चप्पलें


Updated On: 2017-07-15 11:20:00 ऊंची जाति के घरों के आगे से गुजरते वक्त दलितों को उतारनी पड़ती हैं चप्पलें

भोपाल। दलित-पिछड़े समाज के लोग जाति व्यवस्था की चक्की में पिस रहे हैं। बेशक वे आर्थिक पक्ष से मजबूत हो जाएं या जनप्रतिनिधि के पद पर बैठ जाएं, लेकिन जाति भेदभाव की बीमारी उनका पीछा नहीं छोड़ती।

जाति भेदभाव व अत्याचारों को लेकर चर्चा में रहने वाले मध्य प्रदेश में एक नया मामला इसी गैरबराबरी वाली व्यवस्था से पर्दा उठाता है। यहां के टीकमगढ़ जिले के गांव बर्माताल की एक दलित महिला सरपंच खुद न्याय पाने के लिए भटक रही है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, गांव में ऊंची जाति के लोगों के घरों के आगे से गुजरते समय दलितों के पैरों में चप्पल या जूतेे पहनने पर पाबंदी लगाई गई है। ऊंची जाति के इन दबंगों के घरों के आगे से जो भी दलित जूते-चप्पल पहन कर गुजरता है, उसके साथ मारपीट की जाती है। यहां तक कि दलित महिला सरपंच को भी चप्पल पहन इन प्रभावशाली लोगों के घरों के आगे से गुजरने की मनाही है।

इस संबंध में गांव की सरपंच सुलक्खन देवी कहती हैं कि उनके परिवार की कोई भी महिला पैर में चप्पल पहनकर ऊंची जाति के दबंगों के घरों के आगे से निकल नहीं सकती। अगर वे ऐसा करती हैं तो उनके साथ मारपीट की जाती है और बेइज्जत किया जाता है। दबंगों का कहना है कि गांव में ये परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

महिला सरपंच का आरोप है कि इस संबंध में पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। महिला सरपंच से भेदभाव की यह घटना बताती है कि दलित ग्रामीण क्षेत्रों में किन हालात में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

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