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'आरक्षित वर्ग की 50 फीसदी सीटें अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए खोल दी गईं'


Updated On: 2017-08-29 18:12:55 'आरक्षित वर्ग की 50 फीसदी सीटें अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए खोल दी गईं'

आरक्षण व्यवस्था से छेड़छाड़ को लेकर सोमवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया। यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रदर्शन कर रहे इन विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि डीयू के कई विभागों में पिछले कुछ साल से एमफिल व पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण की संवैधानिक प्रक्रिया का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।

करियर मोशंस डॉट कॉम की एक खबर के मुताबिक, प्रभावित अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ दिल्ली यूनिवर्सिटी के वीसी और हिंदी विभाग प्रमुख के नाम ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने मांग की कि हिंदी विभाग द्वारा लिखित परीक्षा सूची को वापस किया जाए और संवैधानिक आरक्षण प्रक्रिया का पालन कर दाखिले लिए जाएं।

इस संबंधी डीयू विद्वत परिषद के सदस्य व हिंदी के शिक्षक डॉ. रसाल सिंह ने बताया कि हिंदी विभाग में एमफिल व पीएचडी प्रवेश की लिखित परीक्षा की परिणाम सूची जारी की गई है। इस सूची में आरक्षित वर्ग की 50 फीसदी सीटें अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए खोल दी गई, जो असंवैधानिक है।

आरक्षित वर्ग के जो उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी की मेरिट कटऑफ में सफल हुए उन्हें सामान्य श्रेणी में शामिल न करके आरक्षित श्रेणी में रखा गया। इसके चलते अनारक्षित श्रेणी की कटऑफ 263 तक चली गई है और ओबीसी की कटऑफ इससे बहुत ऊपर 290 तक चली गई है।

इसी प्रकार भौतिकी विभाग की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया की जारी अंतिम सूची में आरक्षित सीटें पूरी नहीं भरी गईं और इसमें सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को ही प्रवेश दिया गया। आरक्षित श्रेणी की कई सीटों के लिए कोई भी योग्य नहीं पाया गया।

डॉ. सिंह ने बताया कि भूगर्भशास्त्र विभाग में एमफिल व पीएचडी के साक्षात्कार के लिए बुलाए गए। अभ्यर्थियों में पहली रैंक पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को उसके आरक्षित श्रेणी में ही साक्षात्कार के लिए बुलाया गया, जबकि मेरिट के आधार पर अनारक्षित श्रेणी में आने वाले अभ्यर्थी को अनारक्षित वर्ग में ही बुलाया जाना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि अधिक अंक अर्जित करने वाले आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को अनारक्षित श्रेणी में स्थान देकर ही सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

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