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सुप्रीम कोर्ट ने कहा-उसी जगह फिर से गुरु रविदास मंदिर नहीं बनाया जा सकता


Updated On: 2019-10-04 10:14:57 सुप्रीम कोर्ट ने कहा-उसी जगह फिर से गुरु रविदास मंदिर नहीं बनाया जा सकता

दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित श्री गुरु रविदास गुरु घर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उसी स्थान पर श्री गुरु रविदास मंदिर को दोबारा बनाने संबंधी फैसला देने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस धरती पर मौजूद हर किसी की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन ये साफ है कि उस जगह फिर से मंदिर बनाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। मंदिर बनाने के लिए कोई दूसरी बेहतर जगह तलाशिए, वन की जमीन पर नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने पक्षकारों को सर्वमान्य समाधान खोजने और मंदिर निर्माण के लिए बेहतर स्थान के चयन को लेकर चर्चा करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि अगर पक्षकार एक सर्वसम्मत निराकरण लेकर आते हैं, तो आदेश पारित कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मंदिर को पहले वाले स्थान पर बनाने की मांग की गई है।

गौर हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 10 अगस्त को तुगलकाबाद स्थित श्री गुरु रविदास मंदिर को तोड़ दिया गया था। इसे लेकर दलित समाज भडक़ गया था, जिसके बाद 13 अगस्त को पंजाब बंद रहा, जबकि 21 अगस्त को दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से जुटे दलित बहुजन समाज के लाखों लोगों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया था। इसी मामले को लेकर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली आदि प्रदेशों में धरने प्रदर्शनों का सिलसिला चलता रहा।

दलित समाज के लोग तुगलकाबाद स्थित उसी जगह पर मंदिर का निर्माण किए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह स्थान श्री गुरु रविदास जी से संबंधित है, जिसके चलते मंदिर को किसी और स्थान पर बनाना उचित नहीं होगा। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर को उसी स्थान पर बनाने से इनकार करने के बाद दलित समाज के उन लोगों को झटका लगा है।

कोर्ट ने यह चेतावनी दी है कि कोई भी मंदिर तोड़े जाने का राजनीतिकरण या प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा चलेगा। कोर्ट के सख्त रुख के बाद श्री गुरु रविदास जी के पैरोकारों के लिए कानूनी लड़ाई कठिन हो गई है।

उल्लेखनीय है कि संत समाज कई बार इस मुद्दे को लेकर भाजपा के सीनियर नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों से मिल चुका है। हालांकि इसके बाद भी गुरु रविदास नामलेवा संगतों की मांग पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है।

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