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मौत की चौखट पर खत्म हुआ एससी छात्रा के डॉक्टर बनने का सपना


Updated On: 2017-09-02 17:48:01 मौत की चौखट पर खत्म हुआ एससी छात्रा के डॉक्टर बनने का सपना

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाली तमिलनाडु के अरियालुर जिले के कुझुमुर गांव की एससी लडक़ी अनीता ने 1 सितंबर को अपने घर में ही फंदा लगाकर जान दे दी। वह डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन मोदी सरकार के नीट परीक्षा संबंधी फैसले के बाद उसका सपना टूट गया।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, 17 वर्षीय अनीता मजदूर की बेटी थी। उसके तमिलनाडु स्टेट बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 नंबर आए थे। इन अच्छे नंबरों के आधार पर अनीता का एडमिशन एमबीबीएस में हो जाता, लेकिन मोदी सरकार का नया फैसला उसके रास्ते में बाधा बन गया।

पिछले साल तक तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेज में दाखिला बारहवीं में प्राप्त अंकों के आधार पर हो जाता था। हालांकि नीट परीक्षा का आयोजन केंद्र सरकार ने पिछले साल भी किया था, लेकिन तब तमिलनाडु को इससे छूट मिल गई थी। इस साल भी तमिलनाडु सरकार ने अध्यादेश लाकर नीट परीक्षा से बाहर होने का प्रयास किया था, लेकिन 22 अगस्त को सुप्रीट कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए तमिलनाडु सरकार को नीट के तहत मेडिकल काउंसलिंग कराने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि काउंसलिंग प्रक्रिया 4 सितंबर तक पूरी हो जानी चाहिए। इसके बाद केंद्र की मोदी सरकार ने भी कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु को छूट नहीं दी जा सकती है।

इससे पहले केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को इस पर राहत देने की बात कही थी। केंद्र ने कहा था कि सरकार इस तरह के अनुरोध पर सिर्फ एक साल के लिए विचार कर सकती है, लेकिन बाद में केंद्र अपने इस बयान से पीछे हट गई।

मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाली नीट परीक्षा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली लडक़ी अनीता की आत्महत्या के बाद गुस्साए छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। भारी संख्या में स्टूडेंट्स की भीड़ नीट को वापस लिए जाने की मांग कर रही है। मौत के विरोध में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सदस्यों ने चेन्नई की सडक़ों पर हंगामा किया।

अनीता के पिता ने कहा, उसने बेहद मुश्किल परिस्थितियों में पढ़ाई की थी। वह नीट को लेकर काफी परेशान थी। उसने क्या गलत किया था? इसकी जवाबदेही किसकी है?

वहीं, डीएमके नेता सर्वानन ने टाइम्स नाउ से बातचीत में इस पूरे मामले के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया। सर्वानन ने कहा कि नीट को भाजपा ने लागू करवाया है। इसके लिए भाजपा ही जिम्मेदार है। डीएमके नेता ने कहा कि भाजपा ने हमारा गला काटा और राज्य सरकार भी इस हमले से किसी को बचा पाने में असफल रही।

नीट का आयोजन मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेस में प्रवेश के लिए किया जाता है। इस परीक्षा द्वारा उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है, जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेटल कांउसिल ऑफ इंडिया के द्वारा संचालित किया जाता है।

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