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11 राज्यों की निचली अदालतों में 12 फीसदी से भी कम ओबीसी जज


Updated On: 2018-02-02 17:13:36 11 राज्यों की निचली अदालतों में 12 फीसदी से भी कम ओबीसी जज

मंडल कमिशन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश की कुल जनसंख्या में आधे से भी अधिक आबादी पिछड़े समाज (ओबीसी) की है। वहीं, इसी समाज की न्यायालय में उपस्थिति नाममात्र ही है। देश के 11 राज्यों की निचली अदालतों में ओबीसी जज 12 फीसदी से भी कम हैं।

कानून मंत्रालय के डेटा में इन आंकड़ों का खुलासा हुआ है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, निचली अदालतों (जिला अदालतों समेत) अनुसूचित जाति (एससी) 14 फीसदी और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के 12 फीसदी जज हैं।

डेटा के आंकड़े बताते हैं कि ओबीसी समुदाय की आबादी का अनुपात अधिक होने के बावजूद उनकी संख्या कम होने की वजह नियुक्ति में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना हो सकता है।

पिछले साल नवंबर में मंत्रालय की तरफ से सभी 24 हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पत्र लिखकर एससी/एसटी के साथ ओबीसी और महिलाओं को मिलने वाले आरक्षण और इन समुदायों के कितने जज इस वक्त निचली अदालतों में काम कर रहे हैं, की सूचना मांगी थी।

निचली अदालतों में रिजर्वेशन का प्रावधान इस समय देश के सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं है। कुछ राज्यों में ऊपरी स्तर पर न्यायिक सेवाओं में आरक्षण का प्रावधान नहीं है और कुछ राज्यों में निचली अदालतों में एससी/एसटी और ओबीसी समुदाय को रिजर्वेशन दिया जा रहा है।

जिन 11 राज्यों के डेटा आए हैं, वहां के 3,973 जजों की संख्या के आधार पर यह प्रतिशत का औसत है। सभी राज्यों के जिला जजों की संख्या इसमें शामिल नहीं है। इसलिए हो सकता है कि सभी राज्यों के आधार पर जब औसत निकाला जाए तो इन आंकड़ों में कुछ परिवर्तन भी हो सकते हैं।

जिन 11 राज्यों के एससी/एसटी, ओबीसी जजों का आंकड़ा उपलब्ध हो सका है, वहां न्यायिक सेवाओं में रिजर्वेशन का प्रावधान है। इस सर्वे में बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे कुछ बड़े राज्यों को शामिल नहीं किया गया है।

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