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एससी-एसटी को प्रमोशन में नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ


Updated On: 2017-09-01 06:47:13 एससी-एसटी को प्रमोशन में नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति (एससी) व अनुसूचित जनजाति (एसटी) को प्रमोशन में आरक्षण दिए जाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के उस मेमोरेंडम को रद कर दिया है, जिसके तहत एससी-एसटी को 1997 के बाद भी पदोन्नति में आरक्षण का फायदा देने के नियम को जारी रखने का निर्देश दिया गया था।

एक्टिंग चीफ जस्टिस और जस्टिस सी. हरिशंकर की डिविजन बेंच ने डीओपीटी के 13 अगस्त, 1997 के मेमोरेंडम को कानून के खिलाफ बताते हुए यह फैसला सुनाया। बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि इंदिरा साहनी या नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट के जो भी फैसले रहे, उन सभी से साफ है कि एससी-एसटी को पहली नजर में प्रतिनिधित्व का आंकड़ा तैयार किए बिना या अनुचित प्रतिनिधित्व के आधार पर पिछड़े के तौर पर देखना गलत है। इससे संविधान के अनुच्छेद 16(1) और 335 का उल्लंघन हो रहा है और इसी वजह से उक्त मेमारेंडम रद होने लायक है।

इसके अलावा अदालत ने केंद्र व अन्य को इस मेमोरेंडम के आधार पर एससी-एसटी कैटेगरी के लोगों को प्रमोशन में रिजर्वेशन देने पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने हालांकि याचिकाकर्ता की वह मांग ठुकरा दी, जिसमें उसने इस मेमोरेंडम के आधार पर हुए प्रमोशन को रद करने के साथ उन पदों पर जनरल कैटिगरी के लोगों को प्रमोशन का फायदा दिलाए जाने के लिए कहा था।

बेंच ने कहा कि ऐसा आदेश जारी करना संभव नहीं है, क्योंकि प्रमोशन कई तथ्यों पर निर्भर करता है, जिसमें वरिष्ठता, पात्रता शर्तें, पदों की उपलब्धता, कोटा आदि शामिल हैं। अदालत ने हालांकि यह राहत जरूर दी है कि संबंधित मेमोरेंडम के तहत अगर किसी एससी या एसटी कैटेगरी के प्रमोशन के लिए पोस्ट हो तो उस पोस्ट को जनरल कैटेगरी के लोगों के लिए भी ओपन रखा जाए।

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