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इंडियन क्रिकेट टीम में ब्राह्मण-ठाकुर खिलाड़ी 54 फीसदी, दलित एक भी नहीं


Updated On: 2019-07-10 14:04:56 इंडियन क्रिकेट टीम में ब्राह्मण-ठाकुर खिलाड़ी 54 फीसदी, दलित एक भी नहीं

भारतीय क्रिकेट टीम में हमेशा से उच्च जाति वर्ग के खिलाडिय़ों का दबदबा रहा है। पिछले कई सालों से किसी भी दलित खिलाड़ी को क्रिकेट टीम में जगह नहीं मिल पाई है। विनोद कांबली आखिरी ऐसे दलित खिलाड़ी थे, जिन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में जगह मिली थी। 1991 में वनडे क्रिकेट और 1993 में टेस्ट क्रिकेट करियर की शुरुआत करने वाले विनोद कांबली ने कई शानदार पारियां खेलीं। अक्टूबर 2000 के बाद भारतीय टीम में उन्हें कभी चुना नहीं गया।

उनके बाद से आज तक किसी भी दलित खिलाड़ी को भारतीय क्रिकेट टीम में जगह नहीं मिल पाई है। यहां तक कि धार्मिक अल्पसंख्यकों की टीम में उपस्थिति भी नाममात्र रही है।

10 जुलाई को हुए सेमीफाइनल मैच में न्यूजीलैंड के हाथों हारने वाली भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाडिय़ों पर नजर मारें तो इनमें कोई भी दलित चेहरा नहीं था। विश्व क्रिकेट कप के दौरान अच्छी परफार्मेंस देने वाले एकमात्र मुस्लिम खिलाड़ी मोहम्मद शमी को भी सेमीफाइनल में जगह नहीं दी गई। शमी ने वल्र्ड कप 2019 टूर्नामेंट में 4 मैचों में 14 विकेट लेकर अच्छा प्रदर्शन किया था।

न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल खेलने वाली भारतीय क्रिकेट टीम (प्लेइंग इलेवन) पर नजर मारें तो इसमें 4 ब्राह्मण, 2 क्षत्रिय खिलाड़ी हैं, जो कि कुल टीम का करीब 54 फीसदी बैठते हैं। रोहित शर्मा, रिशभ पंत, हार्दिक पंड्या, दिनेश कार्तिक ब्राह्मण, जबकि महेंद्र सिंह धोनी और रविंद्र जडेजा क्षत्रिय समाज से संबंधित हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी उच्च जाति वर्ग (खत्री) से संबंधित हैं।

प्लेइंग इलेवन के अन्य खिलाडिय़ों में भुवनेश्वर कुमार, केएल राहुल, युवेंद्र चाहल और जसप्रीत बुमराह शामिल थे, लेकिन इनमें से कोई भी दलित नहीं था। भारतीय क्रिकेट की शुरुआत से लेकर अब तक बलवंत पालू, एकनाथ सोलकर और विनोद कांबली जैसे गिनती के कुछ दलित खिलाड़ी रहे हैं, जिन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने का मौका मिला।

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