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'अशांत राजनीतिक वातावरण देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए खतरनाक'


Updated On: 2018-05-22 18:21:32 'अशांत राजनीतिक वातावरण देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए खतरनाक'

दिल्ली के आर्कबिशप अनिल काउटो द्वारा पादरियों को लिखे पत्र को लेकर विवाद हो गया है। पत्र में देश के मौजूदा राजनीतिक हालात को अशांत बताते हुए भारतीय संविधान के सिद्धांतों और भारतीय लोकतंत्र को खतरे में बताया गया है।

पादरियों से कहा गया है कि वे हर रविवार को इस पत्र को पढ़ें और प्रार्थना करें कि 2019 में नई सरकार बने। उनके इस पत्र को केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ माना जा रहा है।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, आर्कबिशप अनिल काउटो ने बीते 8 मई को दिल्ली के सभी चर्चों के पादरियों के नाम पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने देश में अशांत राजनीतिक वातावरण की बात करते हुए लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को खतरे में बताया। साथ ही, सभी पादरियों से आग्रह किया है कि वे 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले देश के लिए प्रार्थना करें।

दैनिक भास्कर के मुताबिक, पत्र में लिखा है कि हम एक अशांत राजनीतिक वातावरण देख रहे हैं जो हमारे संविधान में निहित लोकतांत्रिक सिद्धांतों तथा हमारे देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के लिए खतरा है।

साथ ही लिखा गया है, ‘देश तथा राजनेताओं के लिए हमेशा प्रार्थना करना हमारी प्रतिष्ठित परंपरा है, लेकिन आम चुनाव की ओर बढ़ते हुए यह और भी जरूरी हो जाता है। अब जब हम 2019 की ओर देखते हैं, जब हमारे पास नई सरकार होगी, तो आइए हम देश के लिए 13 मई से शुरू करते हैं एक प्रार्थना अभियान।’

पत्र के साथ एक प्रार्थना भेजी गई है, जिसे प्रत्येक रविवार सामूहिक प्रार्थना सभा में पढ़े जाने की बात है। प्रार्थना इस प्रकार है, ‘परमात्मा करे कि हमारे चुनाव पर पूरे सम्मान के साथ वास्तविक लोकतंत्र की परछाई बनी रहे, ईमानदार देशभक्ति की लौ हमारे राजनेताओं की अंतरात्मा को प्रकाशित करे। जब बादलों ने सच, न्याय तथा स्वतंत्रता की रोशनी को ढक लिया है, तब परमात्मा से इस मुश्किल घड़ी में, यही हमारी पुकार है।’

इस पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा है, ‘जातियों और संप्रदायों को उकसाने की कोशिश करना गलत है। आप उन्हें बता सकते हैं कि सही प्रत्याशी या पार्टी के पक्ष में वोट करें, लेकिन ऐसा सुझाव देना कि किसी एक पार्टी को वोट दें और दूसरी को नहीं। बावजूद इसके खुद को धर्मनिरपेक्ष की संज्ञा देना दुर्भाग्यपूर्ण।’

गृह मंत्री राजनाथ सिंह का भी इस पर बयान आया है और उन्होंने कहा है, ‘मैंने पत्र नहीं देखा है, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि भारत एक वो देश है जहां अल्पसंख्यक सुरक्षित हैं और किसी को भी जाति और धर्म के नाम पर भेदभाव करने की अनुमति नहीं है।

दूसरी ओर, आर्कबिशप के सचिव फादर रॉबिंसन ने बयान जारी कर कहा है कि आर्कबिशप का पत्र राजनीतिक नहीं है, न ही सरकार या माननीय प्रधानमंत्री के खिलाफ है। गलत जानकारी नहीं फैलाई जानी चाहिए. ये सिर्फ प्रार्थनाओं के लिए निमंत्रण है। पहले भी इस तरह के पत्र लिखे जा चुके हैं।

हालांकि, आर्कबिशप ने पूरे विवाद पर सफाई भी दी है। उनका कहना है, ‘और क्या कहूंगा मैं? चुनाव और सरकार हमसे संबंधित होते हैं. हमारी सरकार ऐसी होनी चाहिए जो ईसाई समुदाय के लोगों की स्वतंत्रता, अधिकार और कल्याण की परवाह करे। मैं पक्षपातपूर्ण राजनीति के क्षेत्र में दखल नहीं दे रहा हूं। हम केवल प्रार्थना कर रहे हैं कि देश सही दिशा में चलना चाहिए।

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