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ऊना कांड के बाद दलितों के मुद्दे पर फिर उबला गुजरात


Updated On: 2018-02-18 19:03:12 ऊना कांड के बाद दलितों के मुद्दे पर फिर उबला गुजरात

साल 2016 में गुजरात के ऊना क्षेत्र में कथित गौरक्षकों द्वारा चार दलितों को बेरहमी से पीटे जाने की घटना ने देश में बवाल मचा दिया था। इसे लेकर गुजरात के साथ-साथ देशभर में प्रदर्शन हुए थे। करीब डेढ साल बाद एक बार फिर गुजरात में दलितों के मुद्दों पर बवाल मचा हुआ है। मामला यहां के पाटन जिले के ददुआ गांव निवासी भानुभाई वणकर की आत्महत्या का है।

अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित भानुभाई वणकर पूर्व तहसीलदार थे और दलितों के अधिकारों के काम कर रहे थे। सरकार की ओर से दलितों को आवंटित जमीनों के पट्टे व कब्जा दिलाने के लिए जरूरी शुल्क जमा कराने के बावजूद प्रशासन की ओर से उन्हें जमीन नहीं मिल रही थी। गत 17 जनवरी को उन्होंने इस संबंध में पत्र पाटण जिला कलेक्टर को लिखा।

इस पर कार्रवाई ना होने पर 8 फरवरी को भानुभाई ने मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को पत्र लिखकर आत्मदाह की चेतावनी दी। 15 फरवरी को आत्मदाह के नारे लिखे बैनर के साथ वे हेमाबेन व रामभाई आदि के साथ पाटण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। भानुभाई ने खुद पर केरोसीन छिडक़ कर आग लगा ली। इस घटना को वहां मौजूद अधिकारी व पुलिस देखती रही और कुछ लोग मोबाइल से वीडियो उतारते रहे। इलाज के लिए उन्हें गांधीनगर के अपोलो अस्पताल लाया गया, जहां 16 फरवरी की रात उन्होंने दम तोड़ दिया।

उनकी मौत से भडक़े दलित समाज ने राज्य में कई जगह प्रदर्शन किए, हाईवे पर जगह-जगह चक्का जाम कर दिया गया। दलित युवक व महिलाएं सडक़ों पर उतर आए। महिलाओं ने गांधीनगर में सडक़ पर लेटकर सरकार व भाजपा विरोधी नारे लगाए, वहीं युवकों ने गांधीनगर, पाटण, साबरकांठा, बनासकांठा सहित कई जिलों में हाईवे व राजमार्ग जाम कर दिए। एहतियात के तौर पर कई स्थानों पर पुलिस के जवान तैनात किए गए तथा राज्य परिवहन की बसों को स्थगित कर दिया। कई जगह दलितों और पुलिस में टकराव की भी खबरें आ रही हैं।

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