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तीन दिन से भूखे दलित मजदूर की मौत


Updated On: 2017-08-22 19:58:07 तीन दिन से भूखे दलित मजदूर की मौत

देश को आजाद हुए 70 साल का समय बीत चुका है, लेकिन यह चिंता का विषय है कि देश में बनी सरकारें आज तक अपने नागरिकों के पेट भरने का इंतजाम नहीं कर सकी हैं। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में इसी तरह के मामले में एक मजदूर भूख के चलते तड़प-तड़प कर दम तोड़ गया। मरने वाला मजदूर पांच दिन से भूखा था।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, मजदूर के घर 3 दिन से चूल्हा नहीं जला था। मनरेगा में कई दिन से उसे काम नहीं मिल रहा था, इस वजह से परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। उसके बच्चे कई दिन से भीख मांगकर अपना पेट भर रहे थे।

हालात ऐसे थे कि परिवार के पास मृतक का अंतिम संस्कार करने के पैसे नहीं थे। घटना के सामने आने के बाद प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे। उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रुपये और अनाज का इंतजाम करने के साथ ही पोस्टमार्टम के निर्देश दिए। जहां प्रशासन मौत की वजह बीमारी बता रहा है, वहीं मृतक के परिजन भूख से मौत होने की बात कह रहे हैं।

बताया जाता है कि गांव में रहने वाले दलित मजदूर छुट्टन के पास कुछ बीघा जमीन थी, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से वो इस साल अपना खेत नहीं जोत सका।

छुट्टन और उसकी पत्नी ऊषा अपने 3 बच्चों और बूढ़ी मां के पालन-पोषण के लिए मनरेगा की मजदूरी करते थे। दोनों ने मनरेगा में मजदूरी की थी, लेकिन उन्हें इसका न ही भुगतान मिला, न ही मजदूरी मिली। इस वजह से छुट्टन बुरी तरह आर्थिक तंगी की चपेट में आ गया।

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