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दहशत में भगाना के 98 दलित परिवार, गांव लौटने को तैयार नहीं


Updated On: 2018-02-23 10:08:21 दहशत में भगाना के 98 दलित परिवार, गांव लौटने को तैयार नहीं

साल 2012 में हरियाणा के हिसार के तहत आते गांव में अंबेडकर चौक की जमीन से शुरू हुई लड़ाई यहां के दलितों को भारी पड़ गई। आरोप है कि यहां के दलितों को जमीन तो गंवानी पड़ी ही, उन्हें सामाजिक बहिष्कार और चार बेटियों के गैंगरेप की भयानक घटनाओं का भी सामना करना पड़ा।

मार्च 2014 में यहां की चार नाबालिग दलित लड़कियों के साथ उच्च जाति के प्रभावशाली लोगों ने गैंगरेप किए, जिसके बाद यहां के दलित परिवार गांव को छोडक़र चले गए। दलितों में अब भी इतना खौफ है कि वे गांव लौटना नहीं चाहते।

इन परिवारों के पुनर्वास को लेकर मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच चुका है। हाईकोर्ट ने मार्च 2014 में भगाना में चार नाबालिग दलित लड़कियों के साथ हुए गैंगरेप के बाद दलित परिवारों द्वारा गांव छोडऩे के मामले की सुनवाई करते हुए हिसार के डीसी को मौके पर जाकर जायजा लेकर स्टेटस रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, हरियाणा सरकार की ओर से पीआईएल बेंच को दी गई जानकारी में कहा गया है कि गांव छोडऩे के मामले में प्रभावित 238 परिवारों में से 98 के पुनर्वास के लिए पेशकश की गई, लेकिन वे वापस आने को तैयार नहीं हैं।

दूसरी ओर प्रभावित लोगों के वकील ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मामले में उदासीन रवैया अपना रही है। कोर्ट ने कई साल पहले डीसी को मौके पर जाकर रिपोर्ट देने को कहा था, लेकिन डीसी आज तक मौके पर नहीं गए। हाईकोर्ट की पीआईएल बेंच ने डीसी को आदेश दिया कि प्रभावित गांव में जाकर अगली सुनवाई पर वहां की स्थिति के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दायर करें।

इस मामले में पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार को गैंगरेप पीडि़तों और गांव छोड़ गए दलित परिवारों के पुनर्वास के आदेश दिए थे।

अंबेडकर वेलफेयर समिति के वकील आरएस बैंस ने हाईकोर्ट को बताया था कि 2014 में हुई घटना के बाद अब भी कई परिवार प्रभावशाली जाति के डर के मारे गांव वापस नहीं आए हैं। यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद-21 का उल्लंघन है और सरकार है कि इस मामले में कुछ भी नहीं कर रही है।

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