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'21 अगस्त का बहुजन आंदोलन साजिश के तहत भटकाया गया'


Updated On: 2019-08-27 11:18:48 '21 अगस्त का बहुजन आंदोलन साजिश के तहत भटकाया गया'

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर पर दिल्ली के 21 अगस्त के बहुजन आंदोलन को दिशाहीन करने के आरोप लग रहे हैं। अब तक विभिन्न संगठनों से जुड़े सदस्य और बहुजन समाज से संबंधित लोग सार्वजनिक तौर पर चंद्रशेखर की भूमिका पर सवाल खड़े कर चुके हैं। अब इसी कड़ी में बहुजन आंदोलन के लिए काम करने वाले और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने भी चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट भानू प्रताप ने एनपीटी न्यूज से बातचीत करते हुए आरोप लगाया कि गुरु रविदास मंदिर तोड़े जाने के विरोध में 21 अगस्त को दिल्ली में बहुजन समाज की ओर से किए गए आंदोलन को साजिश के तहत भटकाने की कोशिश हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि रामलीला मैदान से साजिशन लोगों को भटकाकर तुगलकाबाद ले जाया गया, लोगों को केसों में फंसाया गया, गंभीर धाराएं लगवाई गईं।

एडवोकेट भानू प्रताप ने चंद्रशेखर पर आरोप लगाते हुए कहा कि 21 अगस्त को संत समाज रामलीला मैदान के मंच पर सुबह 10 बजे से ही मौजूद था, लेकिन चंद्रशेखर रामलीला मैदान में करीब 1.30 बजे पहुंचा, जबकि इससे पहले वह कहां था? चंद्रशेखर देरी से पहुंचा और मंच पर ना जाकर आते ही लोगों को तुगलकाबाद चलने के लिए कहने लगा।

भानू प्रताप ने सवाल उठाते हुए कहा कि तुगलकाबाद जाने की कॉल अगर देनी ही थी तो वह संत समाज की ओर दी जानी चाहिए थे, लेकिन चंद्रशेखर खुद ही कॉल देकर लोगों को वहां से तुगलकाबाद लेकर गया। रामलीला मैदान से करीब 20 किलोमीटर दूर तक लोग चलकर तुगलकाबाद पहुंचे, जहां उन पर लाठीचार्ज हुआ। उन्होंने इसके पीछे साजिश बताई है। भानू प्रताप ने कहा कि जेल में बंद नौजवानों का अब पूरा करियर ही दांव पर लग गया है।

बहुजन आंदोलन से जुड़े भानू प्रताप ने 5 मई 2017 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के अंतर्गत शब्बीरपुर कांड को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दलितों पर हुए हमले के बाद 7 मई को यूपी के डीजीपी सुलखन सिंह ने कहा था कि दलित समाज के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी और हमला करने वाले दोषियों पर कार्रवाई होगी। इसके बावजूद चंद्रशेखर ने 9 मई को कॉल दे दी और झगड़ा कर दिया। इसके बाद दलित समाज के सैकड़ों लोगों को जेल जाना पड़ा।

सहारनपुर की घटना को दिल्ली की घटना से जोड़ते हुए भानू प्रताप ने कहा कि क्या बहुजन आंदोलन को बार-बार भटकाया जा रहा है? ये कहीं ना कहीं नासमझी है या साजिश है।

उन्होंने भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर के कांग्रेस कनेक्शन को लेकर भी सवाल खड़े किए। भानू प्रताप ने कहा कि चंद्रशेखर को लेकर प्रियंका गांधी का ट्वीट आता है तो इसका मतलब उसका कांग्रेस से कनेक्शन है। इससे पहले भी मेरठ अस्पताल में दाखिल चंद्रशेखर से प्रियंका गांधी मिलने गई थीं। उन्होंने कहा कि समाज भोला है, जिसकी ताकत को भटकाया जा रहा है।

इसी तरह सुप्रीम कोर्ट के ही एडवोकेट अजीत, निरवेश और अर्चना ने फेसबुक पर लाइव होकर भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 21 अगस्त को जो आंदोलन हुआ, उसमें 96 लोग जेल में बंद हैं। उन पर ऐसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, ताकि वे जेल से जल्दी बाहर ना आने पाएं।

इन वकीलों ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि हमारे समाज को सोचना चाहिए कि चंद्रशेखर जितने भी आंदोलन करता है, उसमें बेकसूर लोग जेल में बंद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि तुगलकाबाद में जिस दिन श्री गुरु रविदास मंदिर तोड़ा गया था, उस दिन चंद्रशेखर मौके पर मौजूद था। खुद को शेर कहलवाने वाले चंद्रशेखर ने अपने सामने मंदिर टूटने क्यों दिया? वह जेसीबी के आगे क्यों नहीं आ गया? उसने सोशल मीडिया पर लाइव होकर लोगों को तुरंत मौके पर पहुंचने की अपील क्यों नहीं की?

एडवोकेट अजीत ने कहा कि कुछ लोग समाज के नेता बनने की कोशिश करते हैं, हालांकि वो नेता नहीं हैं। वो समाज को धोखा देने के लिए झूठ भी आत्मविश्वास से बोलते हैं। मनुवादी लोगों ने बहुजन समाज में पियादे पैदा कर दिए हैं। ये पियादे समाज को गलत रास्ते पर लेकर जा रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदर्शन राम लीला मैदान में हो रहा था तो हाथ में डंडा लिए चंद्रशेखर ने गाड़ी पर खड़े होकर लोगों को तुगलकाबाद चलने के लिए क्यों कहा? उग्र रूप दिखाने और तोडफ़ोड़ करने से कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर भीम आर्मी के पदाधिकारी इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।

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