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एससी-एसटी अफसरों ने माना-आज भी सहना पड़ता है भेदभाव


Updated On: 2018-02-14 12:01:03 एससी-एसटी अफसरों ने माना-आज भी सहना पड़ता है भेदभाव

अनुसूचित जाति (एससी) या अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग बेशक पढ़-लिखकर अपनी योग्यता के दम पर अफसर ही क्यों ना लग जाएं, जाति भेदभाव कभी उनका पीछा नहीं छोड़ता। सरकारी दफ्तरों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक इन वर्गों के अफसरों को जाति को लेकर कई बार अपमान सहना पड़ता है।

यह बात बीते दिनों मध्य प्रदेश के शाजापुर में अजाक्स के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में आयोजित महासम्मेलन में सामने आई। इस महासम्मेलन में एससी और एसटी वर्ग के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हुए, जिन्होंने जाति भेदभाव को बड़ी समस्या बताया।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महासम्मेलन में यह बात सामने रखी गई कि एससी और एसटी की उपेक्षा को समाप्त करने के लिए संविधान में आरक्षण व्यवस्था को लागू किया गया था, लेकिन शासन-प्रशासन में बैठे चंद लोगों ने आज तक संबंधित वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं लेने दिया।

इसके पीछे एससी-एसटी वर्ग के अधिकारी कर्मचारियों की भी कुछ कमियां रही हैं। अब ऐसा नहीं होगा। बड़े पदों पर बैठे अफसर अब सप्ताह के एक या दो दिन समाज के लिए देंगे। समाज के लोगों का काम करेंगे।

महासम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव व अजाक्स के प्रांताध्यक्ष जेएन कंसोटिया ने खुद मंच से स्वीकार किया कि एससी-एसटी वर्ग के साथ आज भी भेदभाव होता है।

नौकरी लगने के बाद जब एससी-एसटी वर्ग के अधिकारी किराये का मकान ढूंढने निकलते हैं तो जाति पूछने के बाद उन्हें मकान किराये पर भी नहीं दिया जाता। कंसोटिया ने कहा एससी-एसटी वर्ग के अधिकारियों और समाजजनों को अधिकार के लिए अब सजग रहने की जरूरत है।

कंसोटिया ने शासकीय शिक्षकों को भी अच्छे तरीके से शिक्षण कराने की नसीहत दे डाली। उन्होंने साफ कहा कि शासकीय स्कूलों में इन दिनों सिर्फ गरीब और एससी-एसटी वर्ग के बच्चे ही पढ़ाई करने आते हैं। उन्हें यदि अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी, तो समाज कभी आगे नहीं आ सकेगा।

इस दौरान एसएल सूर्यवंशी ने कहा कि आरक्षण को समाप्त करने की बात करने वालों को समाज में फैली अपनी गंदी सोच बदलना चाहिए। यदि समाज से भेदभाव समाप्त हो जाए तो आरक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

अजाक्स के प्रदेश सचिव रावण वर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति के 1.4 लाख पद खाली हैं। ये बैकलॉग पद अगर भरे नहीं जाएंगे तो एससी-एसटी वर्ग के उपेक्षित तख्ता पलटने से पीछे नहीं हटेंगे।

अजाक्स प्रदेश सचिव मीनाक्षी का कहना था कि आरक्षण उपेक्षित समाज को सम्मान दिलाने के लिए किया था, पर अब भी एससी-एसटी वर्ग पीडि़त और शोषित है। जब तक समाज में समानता का दर्जा नहीं मिलता, आरक्षण समाप्त नहीं होने देंगे।

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