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'जाति पर चर्चा होनी चाहिए, पर कम्युनिस्ट और कांग्रेस के लोग जाति की बात को सामने आने नहीं देते'


Updated On: 2018-02-10 13:02:45 'जाति पर चर्चा होनी चाहिए, पर कम्युनिस्ट और कांग्रेस के लोग जाति की बात को सामने आने नहीं देते'

प्रसिद्ध लेखक और बहुजन चिंतक कांचा इलैया ने छोटी जाति के लोगों को अपने जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने के लिए कहा है। उनका कहना है कि निम्न वर्ग के लोगों को जमीन से जुड़ी छोटी-मोटी लड़ाई में ना पडक़र, अमेरिका जैसे बड़े देश का राष्ट्रपति बनने जैसे लक्ष्य हासिल करने चाहिए।

अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के हक में आवाज उठाते आ रहे कांचा इलैया कोझिकोड में आयोजत केरल लिटरेचर फेस्टिवल में अपने विचार रख रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि भारत में अब दलितों के ऊपर प्लानिंग के साथ हमला किया जाता है। यहां दलित होना अब पहले की तरह नहीं है, बल्कि उनके ऊपर पूरी योजना के साथ अटैक होता है।

द न्यूज मिनट के मुताबिक इलैया ने कहा, ‘भारत में दलित होना एक भैंस होने जैसा है। भैंस सबको बहुत ज्यादा दूध देती है, लेकिन उसे गाय की तरह पूजा नहीं जाता।

ऐसी ही स्थिति दलितों की भी है। दलित भी देश में सबसे ज्यादा काम करते हैं। दलित का मतलब ही रचनात्मकता और उत्पादकता है, लेकिन उन्हें मंदिर के अंदर घुसने तक की अनुमति नहीं है। उन्हें अन्य पिछड़े समुदायों के साथ मिलकर इन सबके खिलाफ लडऩा चाहिए। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि इस देश में ओबीसी लोगों की संख्या काफी ज्यादा है, लेकिन उनके पास बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसा कोई दार्शनिक नहीं है।’

कांचा इलैया ने अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्गों के लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे बड़ा उद्देश्य रखें। इसके अलावा उन्होंने दलितों से सडक़ निर्माण और साफ-सफाई जैसा काम ना करने की भी बात कही। उन्होंने कहा, ‘ये सारे काम ब्राह्मण और बनिया लोगों को करने दो। अगर वे नहीं करते हैं तो इसका नतीजा देश को भुगतने दो। गंदगी होने दो पूरे देश में। अगर दलित कचरा साफ नहीं करेंगे तो स्वच्छ भारत कैसे होगा?

केरल में दलितों के अलावा और कोई भी जाति का व्यक्ति कचरा नहीं उठाता। काम दलित कर रहे हैं और सोसायटी ब्राह्मणवाद की तरफ बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि अच्छी बात है कि देश में बीजेपी का शासन है, नहीं तो जाति के मुद्दे पर कभी चर्चा भी नहीं होती।

इलैया ने कहा कि अगर जाति पर चर्चा ही नहीं होगी तो खुलासा कैसे होगा और जाति पर चर्चा नहीं होना दलितों के लिए सही नहीं है। कम्युनिस्ट लोग और कांग्रेस के लोग जाति की बात को सामने आने ही नहीं देते हैं। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वे धर्म के मामले में चर्चा करने से बचते हैं।

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