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चुनाव आयोग ने कहा-बैलेट पेपर अब इतिहास हो गए हैं


Updated On: 2019-09-19 13:39:19 चुनाव आयोग ने कहा-बैलेट पेपर अब इतिहास हो गए हैं

देश में ईवीएम को लेकर बवाल मचा हुआ है। ईवीएम को लेकर ऐसे कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिनमें किसी अन्य पार्टी के चुनाव चिन्ह के सामने वाला बटन दबाने पर भाजपा के चुनाव चिन्ह के सामने वाली बत्ती जग रही है।

साल 2009 से लेकर अब तक राजनीतिक पार्टियां लगातार ईवीएम में गड़बड़ी किए जाने के आरोप लगाती आ रही हैं। बसपा अध्यक्ष कुमारी मायावती 2014 के लोकसभा चुनाव, 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में ईवीएम में हेराफेरी किए जाने के आरोप लगा चुकी हैं।

इसी तरह एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस, आरजेडी, सपा, कांग्रेस, आप, मनसे, टीडीपी, सीपीआई एम आदि राजनीतिक पार्टियां ईवीएम पर सवाल खड़े कर चुकी हैं।

इन पार्टियों के नेता ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव करवाए जाने की मांग कर चुके हैं। जिस तरह ये राजनीतिक पार्टियां ईवीएम पर अविश्वास व्यक्त कर रही हैं, उसी तरह आम लोगों में भी ईवीएम को लेकर कई शंकाएं पैदा हो रही हैं। सोशल मीडिया पर ईवीएम हटाओ, बैलेट पेपर लाओ जैसी मुहिम दिखाई दे रही हैं।

हालांकि इन विरोध के बावजूद चुनाव आयोग ईवीएम को भरोसे योग मान रहा है और इसी के जरिये चुनाव करवाने पर जोर दे रहा है। कुछ समय बाद महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर भी चुनाव आयोग का ऐसा ही बयान आया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने 18 सितंबर को महाराष्ट्र दौरे के दौरान राजनीतिक पार्टियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर अब ‘इतिहास’ हो गए हैं। उन्होंने ईवीएम का बचाव करते हुए कहा कि इन मशीनों से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि ईवीएम किसी अन्य मशीन आपकी घड़ी या गाड़ी की तरह खराब हो सकती है, लेकिन इससे छेड़छाड़ नहीं हो सकती। यह अन्य मशीनों से हट कर है। सुनील अरोड़ा ने कहा कि यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम से जुड़े मुद्दे पर अपने फैसलों में एक तरह से इस बात को बरकरार रखा है।

गौर हो कि आगामी महाराष्ट्र विधानसभा में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर एनसीपी, कांग्रेस और मनसे ने आपत्ति जताई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने राज्यों में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद कहा कि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा में फिलहाल बदलाव नहीं हो सकता। जानकारी हो कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) जैसी पार्टियों ने प्रति उम्मीदवार चुनावी खर्च की सीमा मौजूदा 28 लाख रुपये से बढ़ाने की मांग की थी।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि कुछ दलों के प्रतिनिधियों ने चुनावी खर्च बढ़ाने की मांग की, तो कुछ ने खर्च कम करने की मांग रखी। कुछ ने ईवीएम के बारे में तो कुछ ने वोटिंग लिस्ट में फर्जी लोगों के नाम शामिल करने का मामला उठाया। वहीं कुछ ने मुंबई में सभी मतदान केंद्र ग्राउंड फ्लोर पर ही बनाने की मांग की।

राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का कोई भी प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलने नहीं आया। राजनीतिक हलकों में पहले से ही यह चर्चा है कि ईवीएम के विरोध में राज ठाकरे लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी उम्मीदवार न उतारें।

हालांकि चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा, कोई आयोग से मिलने आए या ना आए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि मनसे का प्रतिनिधि आएगा, क्योंकि ईवीएम को लेकर राज ठाकरे ने ही आंदोलन की चेतावनी दी थी।

चुनाव आयोग के समक्ष एनसीपी नेता नवाब मलिक ने ईवीएम को लेकर शंका व्यक्त की। आयोग से मुलाकात के बाद मलिक ने कहा कि हमने ईवीएम के बारे में मौखिक रूप से बात की है।

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