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2009 में कांग्रेस ने बसपा के 6 विधायक तोड़े थे, 10 साल बाद दोहराई गई फिर वही कहानी


Updated On: 2019-09-17 06:25:27 2009 में कांग्रेस ने बसपा के 6 विधायक तोड़े थे, 10 साल बाद दोहराई गई फिर वही कहानी

साल 2009 में राजस्थान में अशोक गहलोत की अगुवाई में कांग्रेस सरकार बनी थी। कांग्रेस उस समय स्पष्ट बहुमत से 5 कम थी। सरकार बनाने के लिए उसकी नजर बसपा के उस समय के 6 विधायकों पर थी। तब कांग्रेस ने कूटनीतिक चाल चलते हुए बसपा के उन 6 विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कर सरकार चलाई थी। 

अब 10 साल बाद जाकर फिर वही कहानी दोहराई गई है। राजस्थान में अशोक गहलोत की अगुवाई में 10 साल बाद बनी कांग्रेस सरकार ने एक बार फिर बसपा के 6 विधायकों को पार्टी में शामिल कर लिया है। बसपा के छह विधायकों में राजेंद्र सिंह गुढ़ा, जोगेंद्र सिंह अवाना, वाजिब अली, लखन सिंह मीणा, संदीप यादव और दीपचंद शामिल हैं।

कांग्रेस पर बसपा विधायकों को तोडऩे के आरोप लग रहे हैं। कांग्रेस ने बसपा के इन विधायकों को तब पार्टी में शामिल किया है, जब उसकी सरकार को ये विधायक पहले से ही पार्टी अध्यक्ष कुमारी मायावती के निर्देश पर बाहर से समर्थन दे रहे थे।

कर्नाटक, उत्तराखंड में सरकारें गिराने के लिए भाजपा पर विधायकों की खरीदो फरोख्त करने का आरोप लगाने वाली कांग्रेस पर भी बसपा विधायकों को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

बसपा अध्यक्ष कुमारी मायावती ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा है कि राजस्थान में कांग्रेस पार्टी की सरकार ने एक बार फिर बसपा के विधायकों को तोडक़र गैरभरोसेमंद व धोखेबाज पार्टी होने का प्रमाण दिया है।

यह बसपा मूवमेंट के साथ विश्वासघात है, जो दोबारा तब किया गया है, जब बसपा वहां कांग्रेस सरकार को बाहर से बिना शर्त समर्थन दे रही थी।

कांग्रेस अपनी कटु विरोधी पार्टी/संगठनों से लडऩे की बजाय हर जगह उन पार्टियों को ही सदा आघात पहुंचाने का काम करती है, जो उन्हें सहयोग/समर्थन देते हैं। कांग्रेस इसी प्रकार एससी, एसटी, ओबीसी विरोधी पार्टी है तथा इन वर्गों के आरक्षण के हक के प्रति कभी गंभीर व ईमानदार नहीं रही है।

कुमारी मायावती ने कहा कि कांग्रेस हमेशा ही बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर व उनकी मानवतावादी विचारधारा की विरोधी रही। इसी कारण डॉ. अंबेडकर को देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। कांग्रेस ने उन्हें ना तो कभी लोकसभा में चुनकर जाने दिया और न ही भारत रत्न से सम्मानित किया।

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