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वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड का बढ़ता अनुपात जीवन के लिए घातक


Updated On: 2017-11-21 06:48:25 वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड का बढ़ता अनुपात जीवन के लिए घातक

वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा का बढऩा गंभीर चिंता का विषय है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार सोनकर बताते हैं कि इसके चलते मानव अस्तित्व के सामने चुनौती खड़ी हो गई है। वह प्राकृतिक जीवन शैली की ओर लौटने पर जोर देते हैं।

द वायर से बातचीत में डॉ. अजय कुमार ने कहा कि वातावरण में स्थाई रूप से बढ़ रहे कार्बन डाईऑक्साइड का अनुपात धरती पर जीवन को घातक स्थिति की ओर ले जा रहा है, क्योंकि अभी कुछ वर्ष पहले तक वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा 350 पीपीएम थी, जो अब बढक़र 400 पीपीएम पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि अनियंत्रित व अधिक मात्रा में कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन के कारण वातावरण में इसकी मात्रा स्थाई रूप से बढ़ गई है व निरंतर बढ़ती जा रही है।

पेड़ों में 50 प्रतिशत कार्बन होता है। पेड़ वातावरण से कार्बन डाईऑक्साइड लेकर प्रकाश की मदद से उसमें से कार्बन ले लेते हैं और ऑक्सीजन वापस वातावरण में छोड़ देते हैं, लेकिन वातावरण में मौजूद अतिरिक्त कार्बन डाईऑक्साइड पेड़ों को अतिरिक्त कार्बन सोखने के लिए बाध्य करते हैं, जिसके कारण पेड़-पौधों की मूल रचना में परिवर्तन हो रहा है और अतिरिक्त कार्बन के कारण पेड़ों में अतिरिक्त जल की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।

उन्होंने कहा कि ऐसा मनुष्यों के भोजन में उपयोग आने वाली फसलों के साथ भी हो रहा है, जिसके कारण अब हमारे फल सब्जियों में पोषक तत्वों व विटामिंस की वह मात्रा नहीं पाई जा रही है, जो आज से पचास वर्ष पहले हुआ करती थी।

डॉ. सोनकर ने कहा कि लोगों में यह गलत धारणा है कि मास्क पहन लेने अथवा घर में एयर प्यूरीफायर लगा लेने से वे ख़ुद को सुरक्षित कर पा रहे हैं, जबकि कार्बन का बढ़ता स्तर कई गंभीर चुनौतियों को जन्म दे रहा है, जिससे निपटने का ठोस प्रयास करना होगा।एक औसत आदमी प्रतिदिन करीब 550 लीटर हवा का इस्तेमाल करता है।

हवा में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग 20 प्रतिशत होती है। इंसान का शरीर पांच प्रतिशत सोखता है और बाकी 15 प्रतिशत वातावरण में कार्बन डायआक्साईड के साथ वापस छोड़ देता है। उन्होंने कहा कि इन ख़तरों से निपटने के लिए बहुत गंभीर प्रयास करने होंगे और जितना संभव हो प्राकृतिक जीवन शैली की ओर लौटना होगा।

जमीन से निकलने वाले कच्चे तेल को जलाना कम करने की आवश्यकता है और वैकल्पिक ईंधन अपनाने की ओर कदम बढ़ाना होगा जो वायुमंडल को कम से कम नुकसान पहुंचाए।उन्होंने कहा, वाहनों में एक ऐसे फिल्टर को लगाने के बारे में सोचा जा सकता है जो कार्बन को संग्रहित कर उन्हें इकट्ठा कर दे और कार्बन डाईऑक्साइड से ऑक्सीजन को अलग कर दे, जिसे अंजाम देना बहुत जटिल नहीं है।

 

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