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...तो हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा भारत?


Updated On: 2017-08-10 19:22:17 ...तो हिंदू राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा भारत?

सेवानिवृत्त जस्टिस राजेन्द्र सच्चर ने इसी साल अप्रैल में रेडिफ डॉट कॉम से बात करते हुए कहा था कि साल 2019 में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) देश को हिंदू राष्ट्र घोषित कराएगा।

उन्होंने कहा-सबसे खतरनाक संकेत योगी आदित्यनाथ को यूपी का सीएम बनाया जाना है। ये आरएसएस की सोची-समझी योजना का हिस्सा है। हमें भूलना नहीं चाहिए कि नरेन्द्र मोदी केवल चेहरा हैं।

जस्टिस सच्चर ने यह भी कहा था कि आरएसएस तय कर चुका है कि 2019 में भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद वह भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाएगा। हालांकि सारे हिंदुओं का आरएसएस से कोई लेना-देना नहीं है और हिंदू राष्ट्र का विरोध कई हिंदू ही करेंगे।

सच्चर द्वारा कही गई इन बातों के चार महीने बाद आज देश को हिंदू राष्ट्र बनने के लिए कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं। देश के तीन सर्वोच्च संवैधानिक पदों (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति व प्रधानमंत्री) पर भाजपा के जरिये आरएसएस की विचारधारा काबिज दिखाई देती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आरएसएस से पहले से ही जुड़े हुए थे। उनके बाद भाजपा ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति और वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद पर पहुंचा दिया है। कोविंद और नायडू भी आरएसएस से जुड़े रहे हैं। वेंकैया नायडू ने तो लोकसभा में यह भी कह दिया था कि वह संघी हैं और उन्हें इस पर गर्व है।

हिंदुस्तान डॉट कॉम की एक खबर के मुताबिक, यह पहली बार है जब भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद पर संघ से जुड़े व्यक्ति आसीन हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संघ से काफी पुराना नाता है और उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी छात्र जीवन में संघ से जुड़ गए थे। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आरएसएस के प्रचारक रह चुके हैं।

उपराष्ट्रपति नायडू छात्र जीवन के समय 70 के दशक में आरएसएस से जुड़े थे। वेंकैया ने 1972 में जय आंध्र आंदोलन में भाग लिया था। इसके बाद 1973 से 74 तक आंध्र प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे थे। बता दें कि नायडू बतौर स्वयं सेवक दूसरे उपराष्ट्रपति हैं। उनसे पहले भैरोसिंह शेखावत 2002 से 2007 तक उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे।

भारत के मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी स्वयं सेवक रह चुके हैं। जब केंद्र में जनता पार्टी की मोरारजी देसाई सरकार बनी तो कोविंद पीएम के निजी सचिव बने। दिल्ली प्रवास के दौरान ही 1990 के दशक में उनकी मुलाकात जन संघ के नेता हुकुम चंद से हुई थी। हुकुम चंद उज्जैन के रहने वाले थे और उनकी वजह से कोविंद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी से जुड़ गए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बचपन से ही संघ की तरफ झुकाव था। मोदी 1967 में अहमदाबाद पहुंचे और इसी समय 17 साल की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली। इसके बाद 1974 में मोदी नवनिर्माण आंदोलन में शामिल हो गए। इस तरह मोदी राजनीति में आने से पहले कई वर्षों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे।

देश के तीन सर्वोच्च स्थानों पर आरएसएस की विचारधारा से जुड़े चेहरों को बैठाए जाने के साथ-साथ कई क्षेत्रों में हिंदुत्व को बढ़ावा देने वाली नीतियां भी अमल में लाई जा रही हैं।

बहरहाल, भारत को पूरी तरह से हिंदू राष्ट्र बनाए जाने की कोशिशें कितनी सफल होती हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हालांकि इतना जरूर है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव इसे लेकर महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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