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फिल्म निर्माता ने असिस्टेंट डायरेक्टर की पोस्ट के लिए बहुजन समाज की प्रतिभाओं से मांगे आवेदन


Updated On: 2019-09-15 07:27:38 फिल्म निर्माता ने असिस्टेंट डायरेक्टर की पोस्ट के लिए बहुजन समाज की प्रतिभाओं से मांगे आवेदन

नेशनल अवॉर्ड विजेता और मसान जैसी सुप्रसिद्ध फिल्म के निर्माता नीरज घायवन का बहुजन समाज से संबंधित प्रतिभाओं की तलाश के लिए विज्ञापन जारी करना कई लोगों को हजम नहीं हो पाया।

ट्विटर पर एक विज्ञापन जारी करते हुए नीरज ने कहा कि उन्हें हिंदी फिल्मों-टीवी शो के लिए दलित-बहुजन-आदिवासी (डीबीए) पृष्ठभूमि वाले असिस्टेंट डायरेक्टरों और असिस्टेंट राइटरों की तलाश है।

विज्ञापन में कहा गया है कि उम्मीदवार को 2 से 8 साल का फिल्म इंडस्ट्री में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर/चीफ एड/असिस्टेंट राइटर/असिस्टेंट एडिटर काम करने का अनुभव प्राप्त हो। उम्मीदवार को हिंदी-अंग्रेजी भाषा का ज्ञान हो। उसने कम से कम एक फिल्म/टीवी शो बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर/राइटर की हो।

नीरज घायवन की ओर से ट्विटर पर डाला गया यह विज्ञापन कई लोगों को अच्छा नहीं लगा। आपत्ति दर्ज करवाने वालों ने नीरज घायवन द्वारा सिर्फ दलित-बहुजन-आदिवासी पृष्ठभूमि के असिस्टेंट डायरेक्टर/राइटर की मांग किए को जातिवादी करार दिया।

फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने ट्विटर पर लिखा-दलित एक्टिविस्ट की जातिवादी कट्टरता वाले घायवान की यह शुरुआत बहुत ही खतरनाक है। इससे प्रतिभा को खतरा पहुंच सकता है।

वहीं, नीरज ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा-मुझे समझ में नहीं आ रहा कि लोग इस पर इतनी तीव्र प्रतिक्रिया क्यों दे रहे हैं। ये तो मैंने अपने कार्यक्षेत्र में विविधता बढ़ाने के लिए किया है। उन्होंने इसके लिए अमेरिका में व्याप्त ब्लैक सिनेमा का भी हवाला दिया।

उल्लेखनीय है कि जिस तरह भारत में जाति के आधार पर भेदभाव किया जाता है, उसी तरह अमेरिका गोरे-काले के भेदभाव को लेकर चर्चा में रहा है। हालांकि वहां के सिनेमा जगत में क्रांतिकारी कदम उठाए गए और काले लोगों को फिल्मों-टीवी शो में ना सिर्फ प्रतिनिधित्व दिया गया, बल्कि महत्वपूर्ण रोल भी दिए गए। इस कदम को वहां हाशिये पर रहे काले लोगों को बराबरी के मौके दिए जाने और भेदभाव को खत्म करने की ओर बढ़ाया गया कदम बताया गया।

हालांकि भारत में ऐसा दिखाई नहीं देता। यहां के फिल्म-टीवी जगत पर आज भी उच्च जाति से जुड़े लोगों का ही प्रभाव नजर आता है, जबकि दलित-आदिवासी हाशिये पर दिखाई देते हैं।

प्रसिद्ध बॉलीवुड निर्माता नीरज घायवान का कहना है कि उनका कदम हाशिये पर रखे गए इन लोगों को भी फिल्म-टीवी जगत में प्रतिनिधित्व देने की कोशिश है। हाशिये के लोगों को उनकी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। नीरज ने बहुजन समाज से संबंधित और बॉलीवुड डायरेक्टर रंजीत पा की भी तारीफ की, जिन्होंने कबाली और काला जैसी प्रसिद्ध फिल्में बॉलीवुड को दीं।

 

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