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मेयर की 3 कुर्सियां, अनुसूचित जाति वर्ग को 1 भी नहीं


Updated On: 2018-01-27 16:52:06 मेयर की 3 कुर्सियां, अनुसूचित जाति वर्ग को 1 भी नहीं

पंजाब देश का सबसे बड़ी अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की आबादी (फीसदी के मुताबिक) वाला प्रदेश है। जनगणना 2011 के मुताबिक प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी 31.94 फीसदी है। मतलब, पंजाब का लगभग हर तीसरा शख्स एससी वर्ग से संबंधित है।

हालांकि यह हमेशा निराशाजनक रहा है कि अपनी इतनी बड़ी आबादी के बावजूद एससी वर्ग के लोग यहां की राजनीति में हाशिये पर रहे हैं। प्रदेश में अब तक कांग्रेस और अकाली-भाजपा ही सत्ता में रहे हैं, लेकिन यह चर्चा का विषय है कि पंजाब के इतिहास में आज तक इन पार्टियों की सरकारों में एक भी एससी चेहरे को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।

राजनीतिक माहिरों के मुताबिक, प्रदेश की सत्ता पर काबिज रहने वाली पार्टियों ने एससी वर्ग को पद जरूर दिए, लेकिन पावर नहीं। मतलब कि उन्हें अधिकतर कम महत्व वाले ही पद मिल पाए। मुख्यमंत्री पद तो एससी वर्ग को कभी मिला ही नहीं, बल्कि टॉप के मंत्रियों की कुर्सियों पर भी उनकी गिनती नाममात्र ही रही।

अब हाल ही में जालंधर, अमृतसर और पटियाला नगर निगमों के चुनाव के बाद मेयर के पदों लेकर भी ऐसी ही झलक देखने को मिली है। इन तीनों नगर निगमों पर कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ काबिज हुई है। ऐसे में तीनों के मेयर कांग्रेस के बनने तय माने जा रहे थे।

शहर के प्रथम नागरिक माने जाने वाले मेयर की कुर्सी किसे सौंपी जानी है, इसका फैसला बीते दिनों कांग्रेस ने कर दिया। कांग्रेस हाईकमान द्वारा अमृतसर से कर्मजीत सिंह रिंटू, मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के गृह क्षेत्र पटियाला शहर से संजीव शर्मा और जालंधर से जगदीश राजा को मेयर बनाया गया है।

इस चयन प्रक्रिया में सवाल यह उठता है कि एससी वर्ग के लोगों के बड़ी गिनती में वोट हासिल करने और उनकी बड़ी आबादी के बावजूद कांग्रेस ने इस वर्ग के किसी भी चेहरे को मेयर पद पर बैठाना जरूरी नहीं समझा। तीनों नगर निगमों में मेयर पदों पर एससी वर्ग की अनदेखी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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