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भाजपा-कांग्रेस हिंदुत्व की ओर, मोदी-राहुल का मंदिर दर्शन पर जोर


Updated On: 2017-11-11 11:15:25 भाजपा-कांग्रेस हिंदुत्व की ओर, मोदी-राहुल का मंदिर दर्शन पर जोर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में चुनावी सरगर्मी जोर पकड़ चुकी है। अपने किले को बचाने के लिए भाजपा पूरा जोर लगा रही है तो करीब दो दशक से प्रदेश की सत्ता से बाहर रही कांग्रेस अपनी वापसी के लिए मशक्कत कर रही है।

इन दोनों ही राजनीतिक पार्टियों में एक कॉमन बात यह देखने को मिल रही है कि दोनों का ही हिंदुत्व पर जोर लगा हुआ है। चुनाव के समय में मोदी जहां मंदिरों के दर्शन करते हुए दिखाई दे रहे हैं, वहीं राहुल गांधी भी उनसे पीछे नहीं हैं।

चुनावी सरगर्मी के बीच राहुल गांधी कई मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं। वह इस साल गुजरात के अपने पहले दौरे पर सबसे पहले द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन करने गए। इसके बाद सुरेंद्र नगर जिले के चोटिला मंदिर में पहुंचे थे। वह इस मंदिर तक 1000 सीढिय़ां चढक़र गए।

माना जा रहा है कि मंदिरों की यात्रा में राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी को भी पीछे छोड़ दिया है। आमतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जगह-जगह मंदिरों की यात्रा करते हुए देखा गया है, लेकिन इस बार राहुल गांधी उनसे आगे हैं।
9 अक्टूबर से 11 अक्टूबर के बीच राहुल गांधी गुजरात में थे और इस दौरान वो नडियाड के संतराम मंदिर में भी गए। वह भाथीजी महाराज मंदिर भी गए थे, जहां उन्होंने कीर्तन में भी भाग लिया था।

इसके अलावा वह मां काली मंदिर और खेड़ा जिले के मंदिर भी गए। कुछ वक्त पहले गुजरात के सौराष्ट्र के दौरे के दौरान राहुल गांधी ने पांच मंदिरों को दौरा किया था। मध्य गुजरात के भी कई मंदिरों में उन्होंने दर्शन किए। शनिवार को भी वह सबसे पहले अक्षरधाम मंदिर गए।

माना जा रहा है कि राहुल गांधी की यह मंदिर यात्रा नरेन्द्र मोदी का ही एक चुनावी पैंतरा है और इसके जरिए राहुल गांधी ठीक उसी तरह गुजरात में जीत का सपना देख रहे हैं, जिस तरह मोदी सफल हुए थे।

शायद इसीलिए गुजरात दौरे के दौरान राहुल गांधी भी भाथीजी महाराज मंदिर गए, क्योंकि साल 2002 के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाथीजी मंदिर में पूजा करने गए थे।

गौर हो कि जून में चेन्नई में पार्टी की एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि वह भाजपा और आरएसएस से राजनीतिक जंग लडऩे के लिए उपनिषद और गीता का अध्ययन कर रहे हैं।

खबरों के मुताबिक, सियासी रणनीति के तहत ही राहुल के गुजरात के पहले दौरे से लेकर आखिरी दौरे यानी चौथे दौरे तक में जो भी कार्यक्रम बने, वे हिंदू धर्म और हिंदुत्व के इर्द-गिर्द ही घूमते रहे।

कांग्रेस-भाजपा हिंदुत्व के हथियार से वोटरों को लुभाने में लगे दिखाई देते हैं। वहीं बसपा अंबेडकरवादी विचारधारा को ही केंद्र में रखकर चल रही है। बसपा प्रमुख मायावती की बीतेे दिनों प्रदेश में हुई रैली में मुख्य तौर पर एससी, एसटी, ओबीसी व धार्मिक अल्पसंख्यकों पर ही जोर दिया गया था।

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