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मोदी के खिलाफ विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा मायावती


Updated On: 2017-09-06 21:18:13 मोदी के खिलाफ विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा मायावती

केंद्र की सत्ता के लिए 2019 में चुनाव होने हैं। इस चुनावी दंगल के लिए करीब डेढ़ साल का समय ही शेष है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह देशभर में घूम-घूम कर चुनावी रूपरेखा तय करने में लगे हुए हैं। वहीं विपक्षी पार्टियां भाजपा से मुकाबले के लिए राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन की कवायद में जुटी हुई हैं।

अभी तक यह लगभग तय माना जा रहा है कि भाजपा एक बार फिर प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी को ही अपना चेहरा बनाएगी। वहीं मोदी के मुकाबले में विपक्षी पार्टियों का चेहरा कौन होगा, इस पर स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है।

ऐसे में लोगों के बीच यह सवाल आम है कि विपक्ष किस नेता को अपना मुख्य चेहरा बनाए, जो कि न सिर्फ मोदी के मुकाबले का हो, बल्कि संगठित विपक्ष को केंद्र की सत्ता तक भी पहुंचा दे।

इस सवाल के जवाब के तौर पर फिल्ममेकर पंकज बुटालिया हिंदुस्तान टाइम्स में छपे अपने लेख में जमीनी हकीकत से रूबरू करवाते हुए लिखते हैं कि नीतीश कुमार विपक्ष का चेहरा थे, लेकिन वह विपक्ष को छोडक़र भाजपा से हाथ मिला चुके हैं। इससे विपक्ष निराश है।

आमतौर पर भाजपा से मुकाबले में कांग्रेस ही मुख्य पार्टी मानी जाती रही है, लेकिन मौजूदा हालात में कांग्रेस की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं है। ऊपर से कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अभी तक सशक्त नेता के तौर पर नहीं उभर पाए हैं।

कई बार मंचों पर भाजपा व मोदी की नीतियों का गुणगान कर चुके सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव अपनी ही पार्टी में बड़ी फूट के बाद पहले जैसी स्थिति में नहीं हैं। उनके बेटे अखिलेश यादव भी अभी देश का बड़ा चेहरा नहीं बन पाए हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी बंगाल तक सीमित हैं। अम्मा (जयललिता) अब पिक्चर से बाहर हो चुकी हैं। मौजूदा हालात में लेफ्ट द्वारा विपक्ष का प्रतिनिधित्व करने की बात करना व्यर्थ है।

ऐसे में विपक्ष के सामने यह सवाल खड़ा है कि वह किसे अपना चेहरा बनाए? ऐसे परिस्थितियों में जब मोदी ब्रिगेड और आरएसएस देश में पांच साल और राज करने के एजेंडे पर तत्परता से काम करने में जुटे हैं, तब विपक्ष की चिंताएं और बढ़ती दिखाई दे रही हैं।

फिल्ममेकर पंकज बुटालिया बताते हैं कि इन हालात के बीच विपक्ष के पास ऐसा एक चेहरा है, जो कि करो या मरो का दृढ़ इरादा रखता है और वो है बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती। राज्यसभा से इस्तीफा देकर विपक्ष की यह नेता और मजबूत होकर उभरी हैं। उनके पास निष्क्रिय विपक्ष को प्रेरित करने, उसमें जोश भरने की क्षमता है।

इस समय देश में मुस्लिमों और दलितों के लिए चिंताजनक हालात चल रहे हैं। देश में इन दोनों वर्गों को मिलाकर 30 फीसदी आबादी बनती है। दलितों का झुकाव मायावती की ओर रहा है, जबकि मुस्लिम उस चेहरे या पार्टी को ही चुनते हैं, जो कि भाजपा को हराने में सक्षम हो।

ऐसे में मायावती को विपक्ष का मुख्य चेहरा बनाकर इस बड़ी आबादी को साधा जा सकता है। वहीं अन्य वर्गों के वोट भी महागठबंधन के पाले में आएंगे।

दलित वोटों को प्रभावित करने के लिए भाजपा द्वारा दलित को राष्ट्रपति बनाए जाने का मुद्दा उठाया जा रहा है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि अगर दलित राष्ट्रपति बन सकता है तो देश का प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन सकता।

देश को आजाद हुए 70 साल बीत चुके हैं, लेकिन दलित आज तक प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है। मायावती को विपक्ष का मुख्य चेहरा बनाए जाने से भाजपा की दलित कैंपेन की भी हवा निकल सकती है। यही बात विपक्ष को मायावती के साथ मिलकर चलने के लिए तैयार कर सकती है।

यह भी गौर करने वाली बात है कि बतौर राज्यसभा सांसद मायावती केंद्र की मोदी सरकार को जनहित के मुद्दों पर जमकर घेरती रही हैं। मायावती द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों पर सरकार कई बार असहज नजर आई। मायावती भाजपा को जनहित के मुद्दों पर लगातार घेरती आ रही हैं। वह आक्रामक नेता के तौर पर जानी जाती हैं।

देश में जिस तरह से लोगों का भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए से मोहभंग हो रहा है, उसके चलते लोग 2019 में वोट डालने के लिए विकल्प को तलाशेंगे और मौजूदा परिस्थितियों में विपक्ष की ओर से सिर्फ मायावती ही हैं, जो कि उन्हें यह विकल्प उपलब्ध करवा सकती हैं।

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