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गठबंधन हुआ तो बसपा के हिस्से आ सकती हैं 40 लोकसभा सीटें


Updated On: 2018-06-12 18:00:03 गठबंधन हुआ तो बसपा के हिस्से आ सकती हैं 40 लोकसभा सीटें

देश की सत्ता का राह तय करने वाले उत्तर प्रदेश पर इन दिनों सब की निगाहें टिकी हुई हैं। 2014 में भाजपा इसी राज्य में बड़ी जीत के बाद केंद्र की सत्ता पर काबिज होने में सफल रही थी। भाजपा व उसके सहयोगी दलों को यूपी की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 73 पर जीत मिली थी।

हालांकि 4 साल बाद ही अब यहां के सियासी समीकरण काफी बदल चुके हैं। पिछले लंबे समय से एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे बसपा और सपा अब करीब आते जा रहे हैं। वहीं, इन दोनों की एकजुटता के आगे भाजपा केंद्र व प्रदेश की सत्ता में रहने के बावजूद टिक नहीं पा रही है। गोरखपुर, फूलपुर, कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों पर भाजपा की हार बताती है कि 2019 में उसके लिए हालात अच्छे रहने वाले नहीं हैं।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, भाजपा की चिंता अब और बढऩे वाली है। बसपा और सपा के बीच 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर गठबंधन होने और सीटों के बंटवारे को लेकर कुछ-कुछ स्थिति साफ होती नजर आने लगी है।

खबरों पर भरोसा करें तो उत्तर प्रदेश में होने वाले महागठबंधन में बसपा सबसे बड़ी पार्टी होगी। गठबंधन के तहत उसे 40 लोकसभा सीट मिल सकती हैं। वहीं सपा के हिस्से 35 सीटें आएंगी। करीब 3 सीटें राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के खाते में जाने की चर्चा चल रही है।

वहीं, यूपी की सियासत में कमजोर पड़ चुकी कांग्रेस को इस गठबंधन से बाहर रखने की बात हो रही है। उसे गठबंधन में जगह तो नहीं मिलेगी, इतना जरूर होगा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली व अमेठी से बसपा, सपा या आरएलडी कोई भी उम्मीदवार नहीं उतारेंगे।

कांग्रेस को गठबंधन में शामिल ना किए जाने को लेकर जो चर्चा चल रही है, उसके मुताबिक, यह पार्टी प्रदेश में काफी कमजोर पड़ चुकी है। इसका उदाहरण हाल ही में हुए कैराना, गोरखपुर, फूलपुर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिले वोट से लिया जा सकता है।

इन सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों को कोई खास वोट नहीं मिले। फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों को मात्र 19,353 और 18,858 वोट ही मिले। जानकार बताते हैं कि अब प्रदेश में कांग्रेस के पास ना तो दलित वोट हैं और ना ही पिछड़े व धार्मिक अल्पसंख्यक।

सपा और बसपा के रणनीतिकारों का भी मानना है कि कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल करने से कोई फायदा नहीं होगा। उनका मानना है कि कांग्रेस के पास केवल सवर्ण वर्ग का वोट बैंक बचा है, जो महागठबंधन को ना मिलकर भाजपा के साथ जा सकता है। इसलिए बसपा-सपा को लगता है कि कांग्रेस के अलग लडऩे से उन्हें अधिक लाभ मिल सकता है।

बसपा को गठबंधन के तहत सबसे अधिक सीटें मिलने की चर्चा के बाद यह माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा अध्यक्ष कुमारी मायावती की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। बसपा समर्थक तो उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए जोर-शोर से जुटे हुए ही हैं, साथ ही कई विपक्षी पार्टियों के नेता भी उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने को लेकर समर्थन देने की बात कह चुके हैं।

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