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रोहित वेमुला के हाथ में अंबेडकर की तस्वीर ने दिया बड़े आंदोलन को जन्म


Updated On: 2020-01-17 05:40:23 रोहित वेमुला के हाथ में अंबेडकर की तस्वीर ने दिया बड़े आंदोलन को जन्म

आज से चार साल पहले 17 जनवरी 2016 को हैदराबाद यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला ने खुदकुशी कर ली थी। यह बात अलग है कि इस घटना को खुदकुशी नहीं, बल्कि संस्थागत हत्या कहा गया, क्योंकि रोहित वेमुला ने यह कदम मजबूरी में उठाया। रोहित वेमुला ने अपनी मौत से पहले लिखे पत्र में ऐसी व्यवस्था का जिक्र किया था, जिसने उनके जीने की राह में कांटे बिछा दिए थे।

रोहित वेमुला गरीब दलित परिवार से संबंधित थे। घर के हालात ऐसे नहीं थे कि वह अपनी पढ़ाई के खर्च का भुगतान कर सकें। स्कॉलरशिप के सहारे वह अपनी पढ़ाई जारी रख रहे थे। इसी बीच जुलाई 2015 से यूनिवर्सिटी ने रोहित को 25 हजार रुपये मासिक वजीफे का भुगतान करना बंद कर दिया।

रोहित ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) के बैनर तले इस तरह के मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज किया। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वजीफा रोकने के आरोप से इनकार करते हुए इसके पीछे कागजी कार्रवाई में देरी को कारण बताया।

5 अगस्त 2015 को यूनिवर्सिटी ने रोहित और अंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के 4 अन्य सदस्यों के खिलाफ जांच बैठा दी। 2 दिन बाद रोहित वेमुला और उनके साथियों पर ये आरोप लगा दिया गया कि उन्होंने भाजपा के स्टूडेंट विंग एबीवीपी के नेता एन सुशील कुमार पर हमला किया है। 17 अगस्त को भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने उस समय की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को कार्रवाई के लिए चिट्ठी लिखी।

चिट्ठी में कहा गया कि हैदराबाद यूनिवर्सिटी हाल के दिनों में जातिवादी, उग्रवादी और राष्ट्र विरोधी राजनीति का अड्डा बन गई है। इसके बाद सितंबर महीने में रोहित वेमुला और उनके 4 साथियों को निलंबित कर दिया गया। इस निलंबन की पुष्टि के बाद 17 जनवरी 2016 को रोहित वेमुला ने यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी।

उनकी मौत के बाद यूनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि उसी दिन रोहित वेमुला की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई, जिसमें वेमुला ने अपने हाथ में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की एक बड़ी फोटो पकड़ी हुई थी। यह तस्वीर तब की थी, जब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रोहित वेमुला और उनके साथियों को हॉस्टल से निकाल दिया था। रोहित वेमुला अपने सामान और साथियों समेत बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर लेकर चल रहे थे।

रोहित वेमुला की हाथ में डॉ. अंबेडकर की फोटो थामे हुए इस तस्वीर ने ना सिर्फ देशभर में एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया, बल्कि रोहित वेमुला को भी अमर कर दिया। दरअसल, देश और विदेश में बाबा साहब अंबेडकर के करोड़ों पैरोकार हैं।

ऐसे में सोशल मीडिया पर अंबेडकर के साथ रोहित वेमुला की इस तस्वीर और उनकी मौत की खबर ने अंबेडकरवादियों को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद लोगों ने ना सिर्फ सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बड़े स्तर पर विरोध दर्ज करवाया, बल्कि सडक़ों पर आकर भी आंदोलन किए।

यह तस्वीर उस घटना के दिन से लेकर आज तक अंबेडकरवादियों के दिलों में बसी हुई है। रोहित वेमुला का अंबेडकरवादी होना और तस्वीर में उनका अंबेडकर से नजर आने वाला जुड़ाव सिर्फ तत्कालीन ही नहीं, बल्कि सत्ता को हिला देने वाले भविष्य के आंदोलनों की भी नींव रख गया है।

(Our View)

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